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चिकित्सा जगत में शोक की लहर
भारत के चिकित्सा जगत ने एक महान हस्ती को खो दिया है। प्रख्यात न्यूरोसर्जन और पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे गए डॉ. अशोक कुमार महापात्र का 74 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने दिल्ली एम्स में अपनी अंतिम सांस ली, जहां वह तंत्रिका तंत्र से जुड़ी बीमारियों के लिए उपचार करवा रहे थे। उनके निधन की खबर से देश भर के चिकित्सा संस्थानों और स्वास्थ्य जगत में शोक व्याप्त है।
जग्गा और कालिया के लिए रची थी इतिहास
डॉ. महापात्र को सबसे ज्यादा याद उन जुड़वां बच्चों 'जग्गा और कालिया' को अलग करने की जटिल सर्जरी के लिए किया जाता है, जिनके सिर आपस में जुड़े हुए थे। साल 2017 में हुई यह सर्जरी चिकित्सा विज्ञान के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं थी। उन्होंने एक टीम का नेतृत्व करते हुए 16 घंटे तक लगातार ऑपरेशन किया और सफलतापूर्वक उन बच्चों को अलग किया। इस सर्जरी ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई थी।
भुवनेश्वर एम्स की नींव रखने में योगदान
डॉ. महापात्र ने केवल एक सर्जन के रूप में ही नहीं, बल्कि एक संस्थान निर्माता के रूप में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी थी। उन्होंने भुवनेश्वर एम्स को स्थापित करने की प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाई। वह भुवनेश्वर एम्स के पहले निदेशक (डायरेक्टर) के पद पर तैनात हुए थे और वहां के बुनियादी ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
पद्मश्री सम्मान से अलंकृत
डॉ. महापात्र की चिकित्सा के प्रति निष्ठा और वर्षों के योगदान को मान्यता देते हुए, वर्ष 2024 में उन्हें भारत सरकार द्वारा 'पद्मश्री' सम्मान से सम्मानित किया गया था। उनके द्वारा किए गए जटिल न्यूरोसर्जरी के सफल ऑपरेशनों ने न केवल हजारों मरीजों को नई जिंदगी दी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सर्जनों के लिए भी एक मिसाल पेश की है।
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