1 नवंबर को होने वाली 'इंडिया' गठबंधन की रैली से असदुद्दीन ओवैसी ने बनाई दूरी, कहा, 'मुझे इससे कोई सरोकार नहीं' भारत एक घंटा पहले 6
राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली विपक्षी गठबंधन की विशाल रैली में असदुद्दीन ओवैसी शामिल नहीं होंगे। ओवैसी ने साफ किया कि मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर उनकी कानूनी लड़ाई अलग चल रही है।

विपक्षी गठबंधन की रामलीला मैदान रैली से ओवैसी का किनारा

देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में 1 नवंबर को विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन एक बड़ी जनसभा का आयोजन करने जा रहा है। इस विशाल रैली के जरिए तमाम विपक्षी दल निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान और कथित 'वोट चोरी' की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में हैं। इस सिलसिले में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सहित गठबंधन के कई प्रमुख दिग्गजों ने कार्यकर्ताओं तथा आम जनता से इसमें शामिल होने की अपील की है। हालांकि, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस प्रदर्शन से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है।

'कोर्ट में अलग से लड़ रहा हूं अपनी कानूनी लड़ाई': AIMIM प्रमुख

विपक्षी दलों की इस संयुक्त रैली पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने स्पष्ट लहजे में कहा, "मुझे इस आयोजन से कोई लेना-देना नहीं है। मेरा इस रैली से दूर-दूर तक कोई मतलब नहीं है।" उन्होंने आगे बताया कि SIR से जुड़े मामले में उनकी लड़ाई बिल्कुल अलग दिशा में चल रही है। ओवैसी के मुताबिक, वे इस पूरे विषय को लेकर सीधे न्यायालय में कानूनी जंग लड़ रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने SIR को लेकर शुरुआत से ही गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चाहे मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन या नियुक्ति का विषय हो या फिर उन्हें कानूनी संरक्षण प्रदान करने का प्रावधान, वे इन दोनों ही व्यवस्थाओं के सख्त खिलाफ हैं।

समाजवादी पार्टी और उत्तर प्रदेश के मुस्लिम नेतृत्व पर निशाना

उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीति पर अपनी बेबाक राय रखते हुए हैदराबाद के सांसद ओवैसी ने समाजवादी पार्टी (SP) के मुस्लिम नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा में शामिल मुस्लिम चेहरे समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वे केवल अपनी पार्टी के हितों की पैरवी करते हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज अब सिर्फ राजनीतिक दरी बिछाने का काम नहीं करेगा।

सपा नेताओं इकरा हसन और नाहिद हसन का नाम लेते हुए ओवैसी ने कहा कि इन लोगों में सार्वजनिक मंच से 'अस्सलामु अलैकुम' तक कहने का साहस नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुसलमानों को अपना स्वतंत्र राजनीतिक वजूद खड़ा करना होगा। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में उन्हें देश के हर कोने से चुनाव लड़ने का पूरा संवैधानिक अधिकार है।

जामिया और JNU नारों के विवाद पर VC तथा रजिस्ट्रार को घेरा

प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों जामिया मिलिया इस्लामिया और JNU में लिखे गए विवादित और आपत्तिजनक नारों के मुद्दे पर ओवैसी ने सीधे विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल दागे। ओवैसी ने कहा कि यदि परिसरों के अंदर आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, तो इसके लिए वाइस चांसलर (VC) और रजिस्ट्रार सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि ये दोनों प्रशासनिक अधिकारी RSS के घटक संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से ताल्लुक रखते हैं और उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। ओवैसी ने यह भी कहा कि जामिया के अध्ययनरत छात्रों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत और उचित हैं।

शरजील इमाम मामले पर ओवैसी ने मांगी संवैधानिक निष्पक्षता

चर्चित छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम के मामले का जिक्र करते हुए AIMIM प्रमुख ने कहा कि आप किसी व्यक्ति विशेष की विचारधारा से पूरी तरह असहमत हो सकते हैं, यह आपका अधिकार है। लेकिन केवल वैचारिक मतभेदों की वजह से किसी नागरिक को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। ओवैसी ने रेखांकित किया कि निष्पक्ष इंसाफ करना सिर्फ अदालतों का काम है, इसलिए अदालत के भीतर कानूनी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलने दिया जाना चाहिए।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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