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एक घंटा पहले
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दिल्ली में फर्जीवाड़े का बड़ा मामला
राजधानी दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के नाम पर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दिल्ली के संसद मार्ग थाने में अन्या वत्स और संयम सचदेवा के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता अखिलेश गोयल ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर उनसे 1.25 करोड़ रुपये की भारी रकम वसूली है। इतना ही नहीं, मामला यहीं नहीं थमा, बल्कि आरोपियों ने बाद में शिकायतकर्ता से 30 करोड़ रुपये की मांग तक कर डाली।
रॉ के अधिकारियों से जुड़ाव का झूठा दावा
इस पूरे मामले की जड़ में सरकारी रसूख का झूठा इस्तेमाल है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अन्या वत्स ने उसे खुद के बड़े सरकारी ओहदों पर बैठे लोगों से संबंध होने का भरोसा दिलाया था। अन्या ने दावा किया था कि रॉ (RAW) के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सामंत गोयल उसके सगे मामा हैं। साथ ही, उसने अनिल गुप्ता का नाम लेते हुए बताया था कि वे रॉ में संयुक्त सचिव के पद पर तैनात हैं और उसके स्थानीय अभिभावक हैं। इन प्रभावशाली नामों का सहारा लेकर आरोपियों ने शिकायतकर्ता को यह विश्वास दिलाया कि वे सरकारी तंत्र के भीतर किसी भी मामले को निपटाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
कैसे शुरू हुआ ठगी का सिलसिला
पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, इस जालसाजी की शुरुआत 3 सितंबर 2024 को हुई। उस दिन अखिलेश गोयल को एक अनजान नंबर से व्हाट्सएप पर संदेश मिला, जिसमें उन्हें और उनकी पत्नी को ईडी के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद, अन्या वत्स और संयम सचदेवा ने उनसे संपर्क साधा। उन्होंने दावा किया कि मंत्रालय स्तर पर उनकी गहरी पैठ है और वे उसे इस संकट से बाहर निकाल सकते हैं। उन्होंने शिकायतकर्ता को पीएमएलए (PMLA), एनडीपीएस (NDPS) और यूएपीए (UAPA) जैसे सख्त कानूनों में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी।
अक्टूबर 2024 से अगस्त 2025 तक वसूली
आरोप है कि डरा-धमकाकर पैसे वसूलने का यह सिलसिला अक्टूबर 2024 से लेकर अगस्त 2025 तक अनवरत चलता रहा। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने किश्तों में कुल 1.25 करोड़ रुपये अन्या वत्स के एचडीएफसी बैंक खाते में ट्रांसफर किए। इस मोटी रकम को जुटाने के लिए शिकायतकर्ता को अपने करीबियों से उधार लेना पड़ा और बैंकों से लोन तक उठाना पड़ा। आरोपियों ने उसे भरोसा दिलाया कि यह पैसा जुर्माना भरने, सेटलमेंट करने और कानूनी केस को पूरी तरह खत्म करने के लिए लिया जा रहा है।
फर्जी ईमेल और सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग
जांच में यह सामने आया है कि आरोपियों ने सिर्फ फोन कॉल ही नहीं, बल्कि आधिकारिक लगने वाले ईमेल के जरिए भी अपना जाल बिछाया था। शिकायत के अनुसार, 29 नवंबर 2024 को अन्या वत्स की तरफ से एक ईमेल भेजा गया, जिसमें कहा गया कि उनके खिलाफ सभी मामले बंद कर दिए गए हैं। हालांकि, इसके बदले में 96.89 लाख रुपये और 1 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च के तौर पर मांगे गए। इसके बाद 4 अगस्त 2025 को एक और ईमेल भेजा गया, जिसमें यह दावा किया गया कि अन्या ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों को 13.85 करोड़ रुपये का भुगतान किया है और अब शिकायतकर्ता पर 26 करोड़ रुपये का बकाया है। हालांकि, शिकायतकर्ता को इन भुगतानों के एवज में कोई भी वैध रसीद या सरकारी दस्तावेज मुहैया नहीं कराया गया।
30 करोड़ की फिरौती और मानसिक दबाव
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि आरोपी अब 30 करोड़ रुपये की मांग कर रहे थे। एक व्हाट्सएप संदेश में दीवाली से पहले यह बड़ी रकम चुकाने का दबाव बनाया गया और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। इतना ही नहीं, उसे डराने के लिए उसके परिचित गोपाल महाजन के बेटे का नाम भी घसीटा गया। खुद को गृह मंत्रालय, ईडी, रॉ और एनआईए (NIA) का अधिकारी बताने वाले लोगों के फोन कॉल्स ने शिकायतकर्ता पर गहरा मानसिक दबाव बना दिया था।
पुलिस जांच की स्थिति
आखिरकार, 15 अगस्त 2026 को संसद मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज की गई। शिकायतकर्ता ने अपने दावों की पुष्टि के लिए व्हाट्सएप चैट, ईमेल, बैंक ट्रांजैक्शन की कॉपियां, फर्जी नोटिस के स्क्रीनशॉट और भुगतान की विस्तृत समयरेखा पुलिस को सौंप दी है। फिलहाल, पुलिस उन सभी बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है जिनका इस्तेमाल इस गिरोह ने किया था। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं और सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल करने के पीछे का मास्टरमाइंड कौन है।
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