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2 महीने पहले
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विचारों
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बर्थराइट सिटीजनशिप यानी जन्मजात नागरिकता से जुड़े डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया है। इस न्यायिक फैसले ने अमेरिकी राजनीति में इमिग्रेशन और नागरिकता के नियमों को लेकर एक बार फिर हलचल मचा दी है। अदालत के इस कदम के कुछ ही घंटों के भीतर डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को व्यंग्यात्मक लहजे में बधाई देकर सबको चौंका दिया है।
शी जिनपिंग का नाम क्यों लिया?
ट्रंप की इस बधाई के पीछे की मंशा को लेकर अब विश्लेषक अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं। उनका इशारा 1898 के मशहूर फैसले United States v. Wong Kim Ark की ओर था। यह ऐतिहासिक फैसला ही वह आधार है जो अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाले अधिकतर बच्चों को स्वतः ही नागरिकता का हक प्रदान करता है। ट्रंप का यह कटाक्ष इस बात पर केंद्रित है कि कैसे यह कानूनी प्रावधान दूसरे देशों के नागरिकों के लिए अमेरिका में नागरिकता पाना आसान बनाता है।
14वां संशोधन और संवैधानिक स्थिति
इस पूरे मामले की जड़ में अमेरिका का 14वां संविधान संशोधन है। यह संशोधन यह सुनिश्चित करता है कि जो भी बच्चा अमेरिका में पैदा होता है, उसे वहां की नागरिकता दी जाए। लंबे समय से ट्रंप इस प्रावधान में बदलाव की वकालत करते रहे हैं और उनका मानना है कि यह नीति इमिग्रेशन के प्रबंधन में बाधा डालती है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
अमेरिकी इमिग्रेशन पॉलिसी के लिहाज से यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- यह फैसला भविष्य में जन्मजात नागरिकता के नियमों को और अधिक कड़ा करने की कोशिशों पर रोक लगाता है।
- अमेरिकी राजनीति में यह मुद्दा अब ध्रुवीकरण का कारण बन गया है, जहां एक खेमा इसे संवैधानिक अधिकार मानता है तो दूसरा इसे नीतिगत सुधार की जरूरत बताता है।
- ट्रंप की टिप्पणी ने इस बहस को एक अंतरराष्ट्रीय आयाम दे दिया है, जिससे चीन जैसे देशों के साथ कूटनीतिक चर्चाओं में भी इसे जोड़ा जा रहा है।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला यथास्थिति बनाए रखने का संकेत देता है, लेकिन ट्रंप की इस प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि नागरिकता के मुद्दे पर आने वाले समय में भी तीखी बहस जारी रहेगी।
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