अमेरिकी सेना में जासूस की तलाश: 50 जनरलों का हुआ पॉलीग्राफ टेस्ट, ट्रंप प्रशासन आखिर किससे है डरा? विश्व एक घंटा पहले 5
ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच अमेरिकी सेना से खुफिया जानकारी लीक होने की खबरों ने हड़कंप मचा दिया है, जिसके चलते प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए जॉइंट स्टाफ के 50 अधिकारियों की जांच शुरू की है।

अमेरिकी प्रशासन का कड़ा कदम

अमेरिकी सेना के भीतर से गोपनीय जानकारी बाहर आने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईरान के साथ जारी सैन्य तनातनी के माहौल में अमेरिकी हथियारों की कमी से जुड़ी खबरें मीडिया में आने के बाद ट्रंप प्रशासन काफी सख्त हो गया है। इस लीक के पीछे के जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान करने के लिए सरकार ने सेना के भीतर एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया है। हाल ही में अमेरिकी जॉइंट स्टाफ से जुड़े करीब 50 सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट लिया गया है। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इनमें से किसी ने पत्रकारों या बाहरी व्यक्तियों तक संवेदनशील सैन्य जानकारियां पहुंचाई हैं।

पॉलीग्राफ टेस्ट और पूछताछ का आधार

द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दायरे में आए इन अधिकारियों से सीधे तौर पर यह सवाल किया गया कि क्या उन्होंने मीडिया को वर्गीकृत यानी क्लासीफाइड जानकारी साझा की थी। इसके अलावा, उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने अमेरिका के हथियारों के घटते भंडार से जुड़ी गुप्त सूचनाएं किसी पत्रकार को दी हैं। प्रशासन की नजरें विशेष रूप से उन खबरों पर टिकी हैं जिनमें ईरान युद्ध के बाद अमेरिका के लंबी दूरी की मिसाइलों और पैट्रियट इंटरसेप्टर जैसे महत्वपूर्ण हथियारों के स्टॉक में भारी कमी का दावा किया गया था। यह जानकारी अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद संवेदनशील मानी जा रही है।

जांच का समय और उद्देश्य

जानकारी के मुताबिक, इन 50 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट अगस्त के महीने में संपन्न हुआ। यह कदम उस समय उठाया गया जब हथियारों की उपलब्धता और सैन्य तैयारियों को लेकर लगातार कई रिपोर्टें सार्वजनिक हो रही थीं। इन रिपोर्टों ने अमेरिकी सेना की लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या पर सवाल खड़े कर दिए थे, जिससे सरकार की साख पर भी असर पड़ रहा था। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई का मकसद न केवल लीक करने वाले को पकड़ना है, बल्कि अन्य सैन्य कर्मियों को भी एक कड़ा संदेश देना है। प्रशासन यह स्पष्ट करना चाहता है कि गोपनीय सैन्य दस्तावेजों को बाहर साझा करने के परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं और भविष्य में ऐसी किसी भी हरकत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जॉइंट स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका

अमेरिकी सेना का जॉइंट स्टाफ एक बेहद अहम इकाई है। इसमें लगभग 1,500 से 2,000 के बीच अधिकारी और अन्य कर्मचारी अपनी सेवाएं देते हैं। यह संगठन दुनिया भर में फैले अमेरिकी सैन्य कमांडरों के साथ युद्ध की रणनीतियों, सैन्य अभियानों और विभिन्न नीतियों के बीच समन्वय स्थापित करने का काम करता है। ऐसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभाग के 50 लोगों का एक साथ पॉलीग्राफ टेस्ट करवाना एक असामान्य और सख्त कदम माना जा रहा है।

हथियारों के डेटा का महत्व

अमेरिकी सरकार के लिए हथियारों का डेटा केवल संख्या नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का एक संवेदनशील हिस्सा है। हथियारों का कितना भंडार बचा है, इसकी जानकारी मिलना उनके संभावित विरोधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि दुश्मन को इस बात का अंदाजा मिल जाए कि अमेरिका की लंबी दूरी की मिसाइलें या इंटरसेप्टर खत्म होने की कगार पर हैं, तो वे इसका फायदा उठा सकते हैं। इससे अमेरिकी सेना की युद्ध क्षमता, तैयारियों के स्तर और भविष्य में किसी भी लंबे संघर्ष को जारी रखने की क्षमता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। यही कारण है कि ट्रंप प्रशासन इस डेटा लीक को बेहद गंभीरता से ले रहा है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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