ईरान के हमलों से बहरीन में हिल गया अमेरिका का बड़ा नौसैनिक अड्डा, रिपोर्ट ने खोले नुकसान के गहरे राज विश्व 2 महीने पहले 73
ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों ने बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के प्रमुख मुख्यालय को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसे अमेरिका ने लंबे समय तक दुनिया की नजरों से छिपाकर रखा था। अब एक नई रिपोर्ट ने इस तबाही की हकीकत उजागर कर दी है, जिसके बाद पेंटागन को अपनी पूरी पश्चिम एशियाई सैन्य रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।

सामने आई बहरीन के सैन्य अड्डे की बदहाली

ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण स्थिति के दौरान हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की नींव हिलाकर रख दी है। एक हालिया मीडिया रिपोर्ट ने उन दावों पर मुहर लगा दी है कि ईरान के हमलों ने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट के मुख्य केंद्र को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त किया है। यह ठिकाना, जिसे नेवल सपोर्ट एक्टिविटी (NSA) बहरीन के नाम से जाना जाता है, इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक अभियानों का हृदय स्थल है।

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी से लेकर जून के बीच ईरान द्वारा किए गए भीषण हमलों ने इस अड्डे को बुरी तरह प्रभावित किया। रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया गया है कि इन हमलों की चपेट में आने से कमांड मुख्यालय के साथ-साथ कम से कम 12 महत्वपूर्ण इमारतें ध्वस्त हो गईं। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी संचार तंत्र के लिए रीढ़ माने जाने वाले दो सैटेलाइट कम्युनिकेशन टर्मिनल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने इन नुकसानों की विस्तृत जानकारी को हमेशा सार्वजनिक करने से परहेज किया है।

रणनीति बदलने को मजबूर हुआ अमेरिका

यह सैन्य अड्डा न केवल फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय है, बल्कि पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के संचालन के लिए सबसे महत्वपूर्ण केंद्र भी माना जाता है। अमेरिकी सेना की ओर से यह सफाई दी गई है कि इन हमलों से उनके बड़े अभियानों पर कोई खास असर नहीं पड़ा और अधिकांश जवानों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया था। लेकिन हकीकत यह है कि केवल बहरीन ही नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र में मौजूद कम से कम 20 अन्य अमेरिकी सैन्य और राजनयिक अड्डों को भी इन हमलों का सामना करना पड़ा है। इस व्यापक क्षति के बाद अमेरिका अब अपनी संपूर्ण सुरक्षा और रक्षा रणनीति की नए सिरे से समीक्षा कर रहा है।

क्या बड़े बदलाव करने जा रहा है पेंटागन?

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को फिर से मजबूत करने के लिए प्रशासन कई विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इन संभावित बदलावों में बहरीन स्थित बेस का नया और अधिक सुरक्षित डिजाइन तैयार करना, कुवैत और सऊदी अरब में तैनात सैनिकों की संख्या में कटौती करना, और रणनीतिक गतिविधियों को और अधिक पश्चिम की ओर ले जाना शामिल है। इसके अलावा, कमांड सेंटर को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए उन्हें अंडरग्राउंड यानी जमीन के नीचे शिफ्ट करने की योजना पर भी मंथन चल रहा है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि कुछ सैन्य क्षमताओं को इजरायल में स्थानांतरित किया जा सकता है, हालांकि इस दिशा में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

नुकसान छुपाने की कोशिश और करोड़ों का खर्च

अमेरिकी सरकार द्वारा इस नुकसान को छिपाने के प्रयास साफ दिखाई देते हैं। अप्रैल के महीने में अमेरिकी प्रशासन ने क्षतिग्रस्त सैन्य अड्डों की सैटेलाइट तस्वीरों तक आम लोगों की पहुंच पर पूरी तरह रोक लगा दी थी, जिसका आधिकारिक कारण सैनिकों की सुरक्षा को बताया गया था। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कांग्रेस की सुनवाई के दौरान इस तबाही की वित्तीय लागत बताने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। पेंटागन के शुरुआती अनुमान में पूरे युद्ध की लागत लगभग 29 अरब डॉलर बताई गई थी, लेकिन इसमें सैन्य ठिकानों को हुई भारी तबाही की कीमत शामिल नहीं थी।

विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, स्थिति काफी गंभीर है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के आकलन के अनुसार, बहरीन स्थित केवल एनएसए बेस की क्षतिग्रस्त इमारतों को फिर से बनाने के लिए 40 करोड़ डॉलर की भारी-भरकम राशि खर्च हो सकती है। वहीं, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की विस्तृत रिपोर्ट यह इशारा करती है कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को जो नुकसान पहुंचा है, उसकी कुल लागत 2.2 अरब डॉलर से लेकर 5.1 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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