अमेरिकी चुनावों में बदला भारतीय-अमेरिकियों का मिजाज, डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को लगा बड़ा झटका विश्व 46 मिनट पहले 3
अमेरिका के हालिया चुनाव में भारतीय मूल के मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति खुलकर अपना समर्थन दिखाया है, जिससे डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप को झटका, डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर बढ़ा भारतीय-अमेरिकियों का रुझान

अमेरिका में आयोजित चुनाव में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। इस चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कई महत्वपूर्ण सीटों पर निर्णायक जीत दर्ज की है। सबसे खास बात यह रही कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के मतदाताओं के राजनीतिक रुझान में भारी बदलाव देखने को मिला है। जो भारतीय-अमेरिकी समुदाय कुछ समय पहले तक रिपब्लिकन पार्टी और ट्रंप के प्रति आकर्षित हो रहा था, वह अब डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थन में मजबूती से खड़ा दिखाई दे रहा है।

भारत विरोधी बयानों और नीतियों ने बिगाड़ा रिपब्लिकन पार्टी का समीकरण

लगभग दो साल पहले जब अमेरिका में चुनावी माहौल बन रहा था, तब भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग रिपब्लिकन पार्टी की ओर झुकता हुआ दिख रहा था। उस वक्त भारत के प्रति ट्रंप का झुकाव और द्विपक्षीय संबंधों की गर्मजोशी इसकी मुख्य वजह थी। हालांकि, अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान ट्रंप प्रशासन के रुख में अचानक बदलाव देखने को मिला। पाकिस्तान से निकटता और सैन्य प्रमुख मुनीर से जुड़े घटनाक्रमों के साथ-साथ ट्रंप की ओर से गाहे-बगाहे भारत विरोधी बयानबाजी ने राजनीतिक समीकरण बिगाड़ दिए।

विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप का भारत को लेकर नकारात्मक रवैया खुलकर सामने आने लगा। इस भारत विरोधी रुख से प्रवासी भारतीय समुदाय में गहरा असंतोष पैदा हुआ, जो आखिरकार चुनाव के दौरान ट्रंप और उनकी पार्टी के खिलाफ पड़े वोटों में तब्दील हो गया।

MAGA समर्थकों की बयानबाजी और प्रवासियों पर हमले से बढ़ी नाराजगी

भारतीय-अमेरिकी समुदाय की इस नाराजगी के पीछे ट्रंप के राजनीतिक आंदोलन MAGA यानी 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' से जुड़े समर्थकों का रवैया भी एक प्रमुख कारण रहा। MAGA समर्थकों द्वारा भारतीय प्रवासियों को निशाना बनाकर की गई टिप्पणियों और भारत के प्रति अपनाए गए नकारात्मक रवैये से भारतीय समुदाय के लोग काफी आहत हुए।

इस असंतोष का एक बड़ा उदाहरण टेक्सस में देखने को मिला। वहां रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार बो फ्रेंच ने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के दक्षिण एशियाई मूल के छात्रों की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी और उनकी मौजूदगी पर आपत्तिजनक सवाल उठाए थे। इस पोस्ट के सामने आते ही पूरे अमेरिका में भारतीयों की पहचान, प्रवासियों के अधिकार और समाज में उनके स्थान को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। इस तरह की घटनाओं ने भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या रिपब्लिकन पार्टी वास्तव में उनके समुदाय के हितों का प्रतिनिधित्व कर रही है।

कार्नेगी एंडोमेंट और YouGov सर्वे के आंकड़े: 62 फीसदी भारतीयों ने चुना डेमोक्रेटिक विकल्प

भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का बदलता रुझान अक्टूबर 2026 में सामने आए एक सर्वे में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कार्नेगी एंडोमेंट और रिसर्च फर्म YouGov द्वारा 1000 भारतीय-अमेरिकी वयस्कों पर किए गए इस अध्ययन में चौंकने वाले आंकड़े सामने आए:

  • 62 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी नागरिकों ने कांग्रेस चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में वोट देने की बात कही।
  • महज 19 प्रतिशत मतदाताओं ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन किया।
  • जबकि 12 प्रतिशत मतदाता किसी फैसले पर नहीं पहुंचे थे और असमंजस में थे।

इसकी तुलना अगर 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से करें, तो उस समय 62 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकियों ने कमला हैरिस का और 30 प्रतिशत ने डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था। उस वक्त दोनों के बीच 32 प्रतिशत अंक का फासला था, जो 2026 के इस सर्वे में बढ़कर 43 प्रतिशत अंक हो गया। हालांकि दोनों चुनाव अलग-अलग प्रकृति के हैं, फिर भी यह आंकड़े समुदाय के बदले हुए मूड की स्पष्ट गवाही देते हैं।

विरोध का वोट या नीतियों का समर्थन: क्या कहते हैं मतदाता?

सर्वेक्षण में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को समर्थन देने वाले 35 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का फैसला मुख्य रूप से रिपब्लिकन पार्टी के विरोध पर आधारित था। वहीं 65 प्रतिशत मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी और उनके उम्मीदवारों की नीतियों का समर्थन करने को अपनी मुख्य वजह बताया।

भारतीय मूल के प्रत्याशियों का शानदार प्रदर्शन

इस चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने भी अपनी मजबूत छाप छोड़ी। सुहास सुब्रमण्यम और पिया दांडिया समेत भारतीय मूल के कई नेताओं ने शानदार जीत हासिल की। इन नतीजों से साफ उजागर होता है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय का मत किसी एक मुद्दे से बंधा हुआ नहीं है। भारत विरोधी बयानबाजी, प्रवासियों को लेकर अपनाई गई संकीर्ण राजनीति, आर्थिक चिंताएं और ट्रंप प्रशासन की अस्थिर नीतियां, इन सबने मिलकर भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं को रिपब्लिकन पार्टी से दूर धकेल दिया है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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