समंदर में तनाव, वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरा: UNGA में भारत समेत कई देशों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भरी हुंकार विश्व 4 घंटे पहले 3
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत और अन्य प्रमुख देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ते हमलों और बाधाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। सभी देशों ने मिलकर समुद्री सुरक्षा को वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा बताते हुए इसे सुरक्षित रखने की पुरजोर वकालत की है।

समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर बढ़ा वैश्विक दबाव

खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों ने दुनिया भर की सरकारों की चिंता बढ़ा दी है। इसी गंभीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत समेत दुनिया के कई प्रभावशाली देशों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त राष्ट्र में हुई आम बहस के दौरान यह मुद्दा केंद्र में रहा कि जहाजों को निशाना बनाना न केवल एक क्षेत्रीय समस्या है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बड़ा खतरा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की दो टूक

भारत की ओर से अपना पक्ष रखते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि कमर्शियल जहाजों और उनके चालक दल को युद्ध का मोहरा बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा, यानी समुद्र के रास्ते, हर हाल में सुरक्षित और निर्बाध होने चाहिए। विदेश मंत्री ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की और इस बात पर बल दिया कि तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए जाने चाहिए। भारत ने संघर्ष वाले क्षेत्रों में फंसे नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी अपनी गंभीर चिंता जाहिर की है।

समुद्री सुरक्षा सिर्फ क्षेत्रीय मसला नहीं

संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ओमान, सऊदी अरब, बहरीन, सिंगापुर, फिलीपींस और जिबूती जैसे देशों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी आवाज बुलंद की। सभी देशों का मानना है कि समुद्र के रास्तों पर होने वाली कोई भी रुकावट या मनमानी सीधे तौर पर दुनिया के हर कोने में बैठे परिवार को प्रभावित करती है।

होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की चिंताएं

ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी ने होर्मुज स्ट्रेट में जारी संकट के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण इस महत्वपूर्ण रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप होने की कगार पर है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है। ओमान ने स्पष्ट किया कि वे संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के तहत इस जलमार्ग को सभी के लिए खुला रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

सऊदी अरब का रुख और व्यापारिक स्थिरता

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही को एक साझा जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि व्यापारिक रास्तों को किसी भी देश पर दबाव डालने का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी तरह की अतिरिक्त फीस या पाबंदी थोपने के प्रयासों का विरोध किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन रास्तों को राजनीति का अखाड़ा बनाया गया, तो पूरी दुनिया की सप्लाई चेन चरमरा जाएगी।

बहरीन और मानवीय दृष्टिकोण

बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जायानी ने एक मानवीय पहलू की ओर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि समुद्री रास्ते केवल तटीय देशों के लिए नहीं हैं, बल्कि ये दुनिया भर के उन देशों की जीवनरेखा हैं, जिनके पास समुद्र नहीं है। दवाइयों, अनाज और ईंधन की आपूर्ति इन्हीं रास्तों पर टिकी है। यदि इन्हें अवरुद्ध किया जाता है, तो इसका नकारात्मक प्रभाव आम जनता के जीवन पर पड़ेगा।

नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा लाजारो ने चर्चा के दौरान नाविकों की जान की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि वैश्विक व्यापार का 90 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के रास्ते पूरा होता है, जिसमें लगभग 20 लाख नाविक शामिल हैं। इनमें से एक चौथाई से ज्यादा फिलीपींस के नागरिक हैं। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट की एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि नाविकों की जान जाना बेहद दुखद है। उन्होंने खुले और निर्बाध समुद्र की वकालत करते हुए कहा कि समुद्री सुरक्षा का मतलब अंततः मानव जीवन की सुरक्षा ही है।

सिंगापुर का मॉडल और समुद्री नियम

सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने सिंगापुर स्ट्रेट के उदाहरण के जरिए यह बताया कि आपसी सहयोग से समुद्री रास्तों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के व्यापार का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा सिंगापुर स्ट्रेट से गुजरता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानून, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून, इस स्थिरता के पीछे सबसे बड़ी ताकत हैं।

जिबूती और लाल सागर की चुनौती

जिबूती के विदेश मंत्री अब्दुलकादर हुसैन उमर ने लाल सागर में बढ़ते खतरों की ओर इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि बाब अल-मंदेब और लाल सागर में जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा वैश्विक सप्लाई चेन को गंभीर रूप से बिगाड़ सकती है। इन रास्तों का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि ये हिंद महासागर को स्वेज नहर के जरिए वैश्विक बाजारों से जोड़ते हैं।

भारत के लिए समुद्री सुरक्षा का महत्व

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, जो मुख्य रूप से समुद्री मार्गों से आता है। ऐसे में इन रास्तों पर कोई भी अस्थिरता भारत के लिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, माल ढुलाई की लागत में इजाफा और आपूर्ति में देरी का कारण बन सकती है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा भी भारत के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है। यही कारण है कि भारत लगातार इन अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर किसी भी देश की एकतरफा मनमानी या रुकावट के खिलाफ वैश्विक मंचों पर मुखर है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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