ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के बीच डोनाल्ड ट्रंप की दो टूक, कहा- या तो करेंगे डील या ईरान का होगा खात्मा विश्व एक महीने पहले 72
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए धमकी दी है कि या तो तेहरान उनके साथ नए समझौते के लिए तैयार हो जाए, वरना अमेरिका उसे पूरी तरह नष्ट कर देगा।

तनाव के बीच ट्रंप की दो टूक चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक हालिया टेलीविजन साक्षात्कार इस समय वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में जब चल रही थीं, उसी दौरान ट्रंप ने ईरान को एक कड़ा अल्टीमेटम दे दिया। ट्रंप ने साफ लहजे में कहा कि उनके पास ईरान के लिए दो ही रास्ते बचे हैं, या तो वे अमेरिका के साथ एक नई डील करें या फिर पूरी तरह से तबाह होने के लिए तैयार रहें। यह बयान ऐसे नाजुक समय पर आया है जब दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर चर्चाएं चल रही हैं।

समझौता या विनाश का विकल्प

ट्रंप ने अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए दावा किया कि अमेरिका का लक्ष्य स्पष्ट है। वे ईरान के साथ किसी भी सूरत में या तो एक नया समझौता करेंगे या फिर उसका काम तमाम कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति के अनुसार, दोनों देशों के बीच इस समझौते को लेकर बातचीत के दो दौर पहले ही हो चुके हैं। हालांकि, ट्रंप ने सैन्य शक्ति का हवाला देते हुए बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरानी नौसेना के जहाजों और वायु सेना के विमानों को पहले ही भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अंधेरे में किए गए एक सटीक हमले से ईरान का पूरा रडार सिस्टम ध्वस्त हो गया था, जिसके बाद उन्हें पता चला कि उनके पास कोई रडार नहीं बचा है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी नौसेना की अब तक की सबसे बड़ी नाकाबंदी के कारण ईरान लंबे समय तक प्रभावित रहा, जिसे हाल ही में समझौते की उम्मीद में कुछ हद तक ढील दी गई है।

एक घंटे में तबाह हो सकता है ईरान

अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान को मिटाना अमेरिका के लिए कोई बड़ी चुनौती नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना में इतनी ताकत है कि वे केवल एक घंटे के भीतर ईरान के सभी महत्वपूर्ण पुलों को ध्वस्त कर सकते हैं। इसके अलावा, ईरान के पावर ग्रिड और आधुनिक बिजली संयंत्रों को पलक झपकते ही बर्बाद करने में अमेरिका पूरी तरह सक्षम है। ट्रंप का मानना है कि ईरान के पास पहले पर्याप्त धन था, लेकिन अब उनकी आर्थिक स्थिति पूरी तरह से चरमरा चुकी है।

युद्ध के बजाय डील पर जोर

अत्यंत कठोर तेवर दिखाने के बावजूद ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि उनकी पहली पसंद युद्ध नहीं बल्कि एक समझौता ही है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि ईरान की 9 करोड़ से अधिक की आबादी इस संघर्ष के कारण बेवजह कष्ट सहे। इससे पहले भी ट्रंप ईरान को उनके सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के लिए एक हफ्ते का अल्टीमेटम दे चुके हैं। फिलहाल, पूरा विश्व इस बात पर नजर गड़ाए हुए है कि क्या ईरान इन कड़ी शर्तों के बीच कोई नया समझौता करेगा या फिर यह स्थिति किसी बड़े संघर्ष में तब्दील हो जाएगी।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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