ओंटारियो झील का नाम बदलकर 'लेक अमेरिका' करना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा ने दो टूक नकारा विश्व 3 घंटे पहले 2
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओंटारियो झील का नाम बदलकर लेक अमेरिका करने का आदेश जारी किया है, लेकिन कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस बदलाव को मानने से साफ इनकार कर दिया है।

अमेरिका और कनाडा के बीच नाम को लेकर नया विवाद

अमेरिका और कनाडा के बीच कूटनीतिक तनाव के बीच अब एक नया विवाद ओंटारियो झील के नाम को लेकर छिड़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादास्पद कदम उठाते हुए 400 साल पुरानी ओंटारियो झील का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर लेक अमेरिका करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद से दोनों देशों के संबंधों में और अधिक कड़वाहट आने की संभावना बढ़ गई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस एकतरफा फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि उनके देश के लिए यह झील हमेशा लेक ओंटारियो ही रहेगी।

ट्रंप ने क्यों लिया यह फैसला

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने इस नए कार्यकारी आदेश के पीछे झील के रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी महत्व को आधार बनाया है। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ग्रेट लेक्स क्षेत्र में अमेरिका द्वारा की जा रही सुरक्षा और शिपिंग गतिविधियों में उनका योगदान सबसे अधिक है। ट्रंप के अनुसार, ग्रेट लेक्स में मौजूद 11 आइस ब्रेकिंग जहाजों में से 9 जहाज अमेरिकी कोस्ट गार्ड द्वारा संचालित किए जाते हैं, जो कि समुद्री व्यापार मार्ग को खुला रखने के लिए बेहद अनिवार्य हैं।

अमेरिकी सरकार की ओर से यह दावा भी किया गया है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान ग्रेट लेक्स के मीठे पानी के इकोसिस्टम की रक्षा के लिए अमेरिका ने लगभग 4 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि खर्च की है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति ट्रंप ने 1812 के युद्ध के दौरान झील के ऐतिहासिक महत्व और इससे जुड़े अमेरिकी बंदरगाहों का हवाला देते हुए इसे अमेरिका की रक्षा और इतिहास का अहम हिस्सा बताया है।

सरकारी दस्तावेजों में बदलाव की तैयारी

ट्रंप के आदेश के अनुसार, अमेरिकी आंतरिक मामलों के मंत्री को फेडरल बोर्ड ऑन ज्योग्राफिक नेम्स के साथ मिलकर इस नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश के लागू होने के बाद सभी अमेरिकी संघीय एजेंसियों को अपने नक्शों, आधिकारिक अनुबंधों, सरकारी दस्तावेजों और तमाम संचार माध्यमों में अब लेक अमेरिका नाम का ही उपयोग करना होगा। इसके लिए 30 दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। हालांकि, यह आदेश केवल अमेरिकी संघीय सरकार के दायरे तक ही सीमित है और यह कनाडा या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर बाध्यकारी नहीं है।

कनाडा का कड़ा विरोध

कनाडा ने ट्रंप के इस आदेश को पूरी तरह से नकार दिया है। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि ओंटारियो झील का नाम दशकों पुराना है और इसे अचानक बदला नहीं जा सकता। कार्नी ने इतिहास का उल्लेख करते हुए बताया कि ओंटारियो शब्द वेंडैट भाषा के शब्द Ontari’io से निकला है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'सुंदर और बड़ी झील' होता है। यह नाम 400 साल से अधिक समय से उपयोग में है, जो कि कनाडा के गठन और अमेरिका की स्वतंत्रता से भी काफी पहले से प्रचलित है। कार्नी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भले ही अमेरिका अपनी विदेश नीति और भौगोलिक नामों में बदलाव कर रहा हो, लेकिन कनाडा के लिए यह झील हमेशा लेक ओंटारियो ही बनी रहेगी।

झील का भूगोल और चुनौती

ओंटारियो झील केवल अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच एक साझा जल निकाय है। आंकड़ों के अनुसार, झील का लगभग 52 फीसदी सतही हिस्सा कनाडा की सीमा में आता है, जबकि बाकी का हिस्सा अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में स्थित है। यही कारण है कि इस झील के नाम में किसी भी तरह का बदलाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी जटिलता पैदा करता है। निजी मैप कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने अभी तक ट्रंप के इस आदेश पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे स्थिति और भी असमंजस भरी बनी हुई है।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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