हरियाणा
एक घंटा पहले
3
विचारों
अंबाला में तनाव और हाईवे पर महा-संग्राम
हरियाणा के अंबाला में पंजोखरा साहिब विवाद को लेकर उपजा तनाव गुरुवार को हिंसक रूप धारण कर गया। शहर के जग्गा सिटी सेंटर के समीप स्थित नेशनल हाईवे पर दिनभर हंगामे की स्थिति बनी रही। सिख प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए दिल्ली-अमृतसर-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया, जिसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। भारी संख्या में तैनात पुलिस बल ने हाईवे को खाली कराने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठियां भांजीं। इस संघर्ष में सात पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर है, जिसमें एक डीएसपी का अंगूठा भी गंभीर रूप से जख्मी हुआ है। देर रात तक चले इस हंगामे के बाद प्रशासन ने किसी तरह स्थिति पर काबू पाया और यातायात बहाल किया।
विवाद की जड़: पंजोखरा साहिब प्रकरण
यह पूरा विवाद 7 अगस्त से चला आ रहा है। दरअसल, गुरसिमरन सिंह मंड, जो खुद को इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तान टेररिस्ट फ्रंट का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हैं, उस दिन अंबाला के ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री पंजोखरा साहिब पहुंचे थे। उनकी वहां मौजूदगी पर विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि उनके खिलाफ सिख संगत में भारी आक्रोश था, जिसके चलते उन पर हमला किया गया और उनकी कार में तोड़फोड़ की गई। इस झड़प में मंड को बचाने पहुंचे पुलिसकर्मियों समेत चार लोग घायल हो गए थे। पुलिस ने इस घटना को लेकर मामला दर्ज किया था। सिख संगठनों की मुख्य मांग थी कि गुरुद्वारे में हंगामा करने वाले गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसे लेकर वे कई दिनों से दबाव बना रहे थे।
संगत का प्रदर्शन और पुलिस की नाकेबंदी
विवाद को सुलझाने के लिए गुरुवार को एक बड़ी बैठक बुलाई गई थी, जिसमें पंजाब से भी बड़ी संख्या में सिख संगत शामिल हुई। मीटिंग में यह निर्णय लिया गया कि सरकार और पुलिस पर दबाव बनाने के लिए नेशनल हाईवे को जाम किया जाएगा। जब प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा साहिब से हाईवे की ओर कूच करने लगे, तो पुलिस ने पहले ही बैरिकेडिंग कर रास्ता रोकने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा यहीं से भड़क गया और वे बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ गए। स्थिति बेकाबू होते देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, लेकिन संगत वहां से हटने को तैयार नहीं थी और उन्होंने आखिरकार हाईवे पर डेरा डाल दिया।
एफआईआर के बाद भी नहीं थमा विरोध
प्रदर्शनकारियों के लगातार बढ़ते दबाव और हाईवे जाम होने के कारण पुलिस प्रशासन को झुकना पड़ा और शाम तक गुरसिमरन सिंह मंड के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई। उम्मीद थी कि कार्रवाई के बाद प्रदर्शन समाप्त हो जाएगा, लेकिन सिख संगत अपनी एक नई मांग पर अड़ गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिस ने इस दौरान जिन युवाओं को हिरासत में लिया है, उन्हें बिना शर्त तुरंत रिहा किया जाए। इस मांग को लेकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और सिख प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कोई भी सहमति नहीं बन सकी। बातचीत का बेनतीजा रहना तनाव के और बढ़ने का मुख्य कारण बना।
रात का अंधेरा और पुलिस की सख्त कार्रवाई
जैसे-जैसे सूरज ढला और अंधेरा गहराया, अंबाला में स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन ने हाईवे को पूरी तरह खाली कराने का निर्णय लिया और बड़ी संख्या में अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर बुला लिया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बार-बार वहां से हटने की चेतावनी दी, लेकिन जब वे नहीं माने, तो बल प्रयोग का आदेश दे दिया गया। पुलिस ने एक बार फिर आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज शुरू कर दिया। इस सख्त कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए और पुलिस ने नेशनल हाईवे को जाम से मुक्त कराया। पूरे इलाके में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा ऐसी स्थिति न बने।
घायल पुलिसकर्मियों का हाल और डीजीपी का दौरा
इस हिंसक झड़प में कुल सात पुलिसकर्मियों के घायल होने की पुष्टि हुई है। डीएसपी वीरेंद्र शर्मा के अंगूठे में गंभीर चोट आई है। इसके अतिरिक्त, सिपाही रक्षित, नवीन कुमार, हेड कांस्टेबल संदीप कुमार, सहायक उप निरीक्षक सतीश और एएसआई पंकज (जिनकी उंगलियों में चोट आई है) समेत अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने स्वयं मिलिट्री अस्पताल और नागरिक अस्पताल पहुंचकर घायल जवानों का हालचाल जाना। डीजीपी ने चिकित्सकों से उनके उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी ली और बहादुर जवानों का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि ड्यूटी के दौरान जवानों का समर्पण सराहनीय है और हरियाणा पुलिस अपने हर सदस्य के साथ मजबूती से खड़ी है।
कानून और व्यवस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता
डीजीपी अजय सिंघल ने मीडिया से बातचीत करते हुए साफ कर दिया कि कानून-व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मी पूरी निष्ठा के साथ अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। उन्होंने जनता से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि कानून को हाथ में लेना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने आग्रह किया कि विरोध प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक मार्गों को बाधित करना गलत है और इससे आम नागरिकों को काफी परेशानी होती है। फिलहाल मौके पर हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन अंबाला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
कौन हैं गुरसिमरन सिंह मंड?
विवाद के केंद्र में रहे गुरसिमरन सिंह मंड पंजाब के लुधियाना के निवासी हैं और सक्रिय राजनीति से जुड़े हैं। वे कांग्रेस पार्टी के नेता भी हैं और 2023 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त किया गया था। मंड अपनी पहचान इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तान टेररिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में करते हैं। वे लंबे समय से खालिस्तान समर्थित गतिविधियों और कट्टरपंथ के खिलाफ मुखर रहे हैं। वर्ष 2018 में जब उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रतिमा पर पड़ी कालिख को अपनी पगड़ी से साफ किया था, तब वे देशभर में चर्चा का विषय बन गए थे।
Comments
0 comment