उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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पुलिस के लिए पहेली बनी शाइस्ता
उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में कभी एक बड़ा नाम रही शाइस्ता परवीन आज राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित है और वह पिछले 3 साल 5 महीने से अधिक समय से कानून की नजरों से बचकर भाग रही है। कभी पुलिस कॉलोनी के माहौल में पली-बढ़ी शाइस्ता के खिलाफ आज हत्या, जबरन वसूली और धोखाधड़ी जैसे 7 से अधिक गंभीर मुकदमे दर्ज हैं। उमेश पाल हत्याकांड के बाद से ही उसके ठिकाने के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है।
उमेश पाल हत्याकांड और साजिश
प्रयागराज में 24 फरवरी 2023 को हुए उमेश पाल हत्याकांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस हत्याकांड की पटकथा लिखने और इसे अंजाम तक पहुँचाने में शाइस्ता परवीन की भूमिका बहुत बड़ी थी। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ कि घटना के समय से ही वह फरार है और तब से आज तक एसटीएफ (STF) समेत तमाम खुफिया एजेंसियां उसे तलाश रही हैं, लेकिन वह लगातार पुलिस को चकमा देने में कामयाब रही है।
शाइस्ता पर दर्ज गंभीर अपराधों की फेहरिस्त
शाइस्ता परवीन पर दर्ज मुकदमों का दायरा बेहद व्यापक है। प्रयागराज के विभिन्न थानों में उसके विरुद्ध निम्नलिखित धाराओं और आरोपों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं:
- उमेश पाल और सुरक्षाकर्मियों की हत्या: उमेश पाल और उनके दो सरकारी गनरों की दिनदहाड़े हत्या की साजिश में मुख्य रूप से नामजद होना।
- आपराधिक साजिश (IPC 120B): अतीक गैंग (IS-227) के शार्प शूटर्स को मोबाइल फोन, सिम कार्ड और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना।
- रंगदारी और धमकी: पति के जेल जाने के बाद प्रयागराज के बिल्डरों और व्यापारियों से करोड़ों की अवैध वसूली करना और न देने पर जान से मारने की धमकी देना।
- धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज (IPC 420, 467, 468): अवैध जमीन सौदों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करना और गलत नाम-पते पर सिम कार्ड हासिल करना।
- आर्म्स एक्ट: शूटर्स को अवैध हथियार और कारतूस मुहैया कराने का आरोप।
- गैंगस्टर एक्ट: माफिया गैंग (IS-227) को संचालित करने के आरोप में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई।
- अदालत की अवमानना: पेशी पर न आने और भगोड़ा घोषित होने के बाद IPC की धारा 174-A के तहत अलग से केस दर्ज।
फरारी के 1250 से ज्यादा दिन
शाइस्ता परवीन 24 फरवरी 2023 से लापता है। इन 3 साल से अधिक समय (कुल 1250 दिन से ज्यादा) की फरारी के दौरान उसके परिवार में कई बड़े बदलाव हुए। उसके पति अतीक अहमद, देवर अशरफ और बेटे असद की मौत हो चुकी है। हाल ही में उसके सबसे छोटे बेटे आबान का सड़क हादसे में निधन हुआ, लेकिन बावजूद इसके शाइस्ता कहीं भी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई। हालांकि, चर्चाएं अक्सर चलती रहती हैं कि उसने बुर्के की आड़ में छिपकर कई बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, लेकिन पुलिस इसे अभी तक पुख्ता नहीं कर पाई है।
इनामी राशि और पुलिस की कार्रवाई
फिलहाल, उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से शाइस्ता परवीन पर 50,000 रुपये का इनाम रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, उसकी बढ़ती फरारी और अपराध की गंभीरता को देखते हुए प्रयागराज पुलिस और एसटीएफ ने इस इनामी राशि को बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है, हालांकि आधिकारिक रूप से अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
खुफिया जानकारी के अनुसार, जब अतीक और अशरफ जेल में बंद थे, तब शाइस्ता ही अतीक के पूरे बेनामी कारोबार और गैंग (IS-227) की बागडोर संभाल रही थी। शूटर्स को संरक्षण और पैसा देने में उसकी प्रमुख भूमिका थी। पुलिस ने कौशांबी, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, मुंबई और प्रयागराज के कछार इलाकों में सैकड़ों बार दबिश दी है। लेकिन बुर्के की आड़ और उसके स्थानीय नेटवर्क ने उसे अब तक कानून की पहुंच से बाहर रखा है।
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