सेना को मिली 'आकाश तरंग' की ताकत, बिना मिसाइल चलाए ड्रोन का खात्मा करना होगा संभव भारत 3 महीने पहले 124
भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता में बड़ा इजाफा करते हुए 'आकाश तरंग' को शामिल कर रही है, जो दुश्मन के ड्रोन को बिना गोली या मिसाइल चलाए ही बेअसर कर देगा।

भविष्य के युद्ध की तैयारी में भारतीय सेना

भारतीय सेना आने वाले समय की चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को पूरी तरह से आधुनिक बना रही है। इस कवायद में एक बेहद खास सिस्टम 'आकाश तरंग' को शामिल किया गया है, जो युद्ध की रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब दुश्मन के नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए सेना को हमेशा ब्रह्मोस या अग्नि जैसी मिसाइलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि 'आकाश तरंग' अकेले ही दुश्मन की कमर तोड़ने में सक्षम होगी। यह हाईटेक हथियार बिना किसी मिसाइल के इस्तेमाल के ही दुश्मन के ड्रोन हमलों को विफल करने की ताकत रखता है। हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी DAC ने लगभग 52 हजार करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण रक्षा सौदों को अपनी मंजूरी दी है, जिसमें इस आधुनिक सिस्टम की खरीद प्रमुखता से शामिल है।

क्यों बदल गया है युद्ध का स्वरूप

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में युद्ध लड़ने के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। पहले की लड़ाइयां मुख्य रूप से टैंकों, फाइटर जेट्स और बड़ी मिसाइलों के इर्द-गिर्द घूमती थीं। लेकिन आज के समय में छोटे और घातक ड्रोन एक बहुत बड़ा सुरक्षा खतरा बनकर उभरे हैं। दुनिया भर में हुए संघर्षों के दौरान ड्रोन की घातक भूमिका को सभी ने करीब से देखा है। इसी खतरे को देखते हुए भारत अब सिर्फ आक्रामक हथियारों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं कर रहा है, बल्कि दुश्मन के हमले को शुरू होने से पहले ही रोकने वाली तकनीक को भी प्राथमिकता दे रहा है।

कैसे काम करता है आकाश तरंग

आकाश तरंग को एक एडवांस्ड एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम माना जा रहा है। सरल शब्दों में समझें तो यह दुश्मन के ड्रोन को किसी मिसाइल या गोली से नष्ट करने के बजाय सीधे उसके कंट्रोल सिस्टम को अपने कब्जे में ले लेता है। हर ड्रोन अपने ऑपरेटर से रेडियो सिग्नल के माध्यम से जुड़ा रहता है, जिससे उसे उड़ान भरने, दिशा तय करने और अपने लक्ष्य को निशाना बनाने के निर्देश मिलते हैं। 'आकाश तरंग' इसी महत्वपूर्ण संचार लिंक पर हमला करने का काम करता है।

जब भी कोई दुश्मन ड्रोन भारतीय सेना की सीमा, संवेदनशील ठिकानों या एयरबेस की ओर बढ़ने की कोशिश करेगा, तो यह सिस्टम उसके कम्युनिकेशन लिंक को पूरी तरह जाम कर देगा। संपर्क टूटते ही ड्रोन अपने ऑपरेटर से कट जाएगा। इसके अलावा, 'आकाश तरंग' दुश्मन के ड्रोन के GPS सिस्टम को भी भ्रमित करने में सक्षम है। जैसे ही यह सिस्टम एक्टिव होगा, ड्रोन अपनी दिशा भटक जाएगा और सुरक्षित स्थान पर गिरने के बजाय कहीं और जाकर बेकार हो जाएगा। यह तकनीक सुरक्षा घेरे को और अधिक अभेद्य बनाने में मददगार साबित होगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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