फ्लाइट में टर्बुलेंस और ड्रग टेस्ट का मामला, एयर इंडिया ने 5000 पायलटों के लिए बनाई नई सख्ती व्यापार एक घंटा पहले 4
एयर इंडिया ने अपनी उड़ानों में सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत करने के लिए सभी पायलटों का साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। यह बड़ा फैसला फुकेट-दिल्ली फ्लाइट में हुए टर्बुलेंस और पायलट के ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद लिया गया है।

पायलटों की फिटनेस पर एयर इंडिया का कड़ा रुख

एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अपनी उड़ानों की सुरक्षा और चालक दल की फिटनेस को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने सभी पायलटों की अनिवार्य साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्टिंग करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय एयरलाइन के बेड़े में कार्यरत 5000 से अधिक पायलटों पर लागू होगा। यह कदम विमानन क्षेत्र के मौजूदा नियमों की तुलना में काफी विस्तृत और सख्त है, जिसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की मानवीय चूक या नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी जोखिमों को पूरी तरह समाप्त करना है।

जांच की प्रक्रिया और स्थान

एयरलाइन की ओर से जारी आंतरिक निर्देश के अनुसार, अब सभी पायलटों को इस अनिवार्य जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा। इस स्क्रीनिंग में न केवल नशीले पदार्थों, बल्कि उन सभी दवाओं की भी जांच की जाएगी जो विमानन सुरक्षा नियमों के अंतर्गत प्रतिबंधित या नियंत्रित श्रेणी में आती हैं। इस जांच को अंजाम देने के लिए एयर इंडिया ने विशेष रूप से गुरुग्राम स्थित अपनी अकादमी को चुना है। इसके अलावा, पायलटों के ब्रीफिंग सेंटर, एयरलाइन के कार्यालयों और उनके निर्धारित होम बेस वाले स्थानों पर भी यह परीक्षण किए जा सकते हैं।

नियमों के दायरे से बाहर जाकर लिया फैसला

विमानन नियामक के मौजूदा दिशा-निर्देशों के मुताबिक, एयरलाइंस को अपने कुल फ्लाइट क्रू के कम से कम 10% हिस्से का रैंडम साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट हर साल करना अनिवार्य होता है। हालांकि, एयर इंडिया ने इस न्यूनतम आवश्यकता से कहीं आगे बढ़कर अपने संपूर्ण पायलट कार्यबल की स्क्रीनिंग करने का अभूतपूर्व निर्णय लिया है। इस पहल के माध्यम से एयरलाइन अपनी सुरक्षा संस्कृति को और अधिक पारदर्शी बनाना चाहती है ताकि यात्रियों का विश्वास बरकरार रहे।

फुकेट-दिल्ली फ्लाइट की घटना के बाद कार्रवाई

यह सुरक्षा संबंधी बदलाव 4 अगस्त को हुई एक चिंताजनक घटना के बाद सामने आया है। एयर इंडिया की फ्लाइट संख्या AI2379 के दौरान, जो एक एयरबस A320neo विमान था, फुकेट से दिल्ली की यात्रा कर रही थी। उड़ान के दौरान अचानक तेज टर्बुलेंस के कारण विमान लगभग 300 फीट यानी 91 मीटर की ऊंचाई से नीचे गिर गया। उस समय विमान में 137 यात्री और 8 क्रू सदस्य सहित कुल 145 लोग मौजूद थे। इस घटना में करीब 24 यात्रियों के घायल होने की खबर आई थी।

पायलट के ड्रग टेस्ट रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

इस टर्बुलेंस की घटना के बाद जब विमान के पायलट-इन-कमांड की जांच की गई, तो मामला और गंभीर हो गया। प्रारंभिक साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्ट में पायलट की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद जब पुष्टि करने के लिए कन्फर्मेटरी टेस्ट किया गया, तो उसमें मारिजुआना के अंश पाए गए। इस घटना ने पूरे विमानन जगत में हलचल मचा दी है और पायलटों की ड्यूटी के दौरान फिटनेस को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एयर इंडिया का यह ताजा निर्देश इसी घटनाक्रम की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, ताकि ड्यूटी पर मौजूद कोई भी पायलट नशीले पदार्थों के प्रभाव में न रहे।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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