राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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कॉकरोच जनता पार्टी में मची हलचल
अभिजीत दिपके द्वारा शुरू की गई कॉकरोच जनता पार्टी के लिए यह समय किसी बड़े झटके से कम नहीं है। महज दो महीने पहले सुर्खियों में आई इस पार्टी में अब आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी से जुड़े रहे मनीष ब्रह्मभट्ट ने अपनी राहें अलग कर ली हैं और उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी डेमोक्रेटिक यानी CJP-D नाम से एक नया राजनीतिक गुट बना लिया है। इस घटनाक्रम से संगठन के भीतर जेन-जी वर्ग का एक बड़ा हिस्सा अब नई पार्टी की ओर झुकता हुआ दिखाई दे रहा है।
कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट और उनका राजनीतिक सफर
मनीष ब्रह्मभट्ट ने राजनीति में कदम रखने के लिए वर्ष 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव को चुना था। उस दौरान वे पालनपुर विधानसभा सीट से एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतरे थे। हालांकि, चुनाव परिणामों में उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी और वे कुल वोटों का महज 0.53% यानी 964 वोट ही हासिल कर सके। उस चुनाव में वे पांचवें स्थान पर रहे, जबकि वहां से भाजपा के उम्मीदवार अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी।
ब्रह्मभट्ट की आयु लगभग 41 वर्ष है और पेशे से वे एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट हैं। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से बी.कॉम और एफ.वाई. एलएलबी तक की पढ़ाई की है। वर्ष 2022 में चुनाव आयोग को दिए गए अपने हलफनामे में उन्होंने बताया था कि उनके पास कुल 44.42 लाख रुपये की संपत्ति है और उन पर कोई भी कर्ज नहीं है।
कानूनी विवाद और आपराधिक मामले
मनीष ब्रह्मभट्ट के राजनीतिक करियर के साथ विवादों का भी नाता रहा है। उनके खिलाफ कुल 4 आपराधिक मामले दर्ज हैं। चुनाव हलफनामे में दी गई जानकारी के अनुसार, इन मामलों में गंभीर चोट पहुंचाने, दंगा भड़काने और मानहानि जैसी धाराएं शामिल हैं। उनके विरुद्ध आईपीसी की धारा 325 (गंभीर चोट), 505(2) (समूहों में वैमनस्य फैलाना), 114 (अपराध में सहयोग), 323 (साधारण चोट), 153 (दंगा भड़काना), 501 और 502 (मानहानिकारक सामग्री का प्रकाशन और बिक्री) के तहत आरोप दर्ज हैं।
जंतर-मंतर आंदोलन से अलग होने की कहानी
मनीष ब्रह्मभट्ट का दावा है कि वे जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में एक सक्रिय स्वयंसेवक और कोऑर्डिनेटर के तौर पर शामिल थे। विवाद की शुरुआत अगस्त महीने में हुई, जब वे गुजरात से छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे। वहां अभिजीत दिपके अपनी कोर टीम के साथ बैठक कर रहे थे। उस समय मनीष ब्रह्मभट्ट और उनके साथी राहुल पांड्या ने दिपके के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि आंदोलन के मुख्य सूत्रधार रहे आम कार्यकर्ताओं को संगठन के महत्वपूर्ण निर्णयों से पूरी तरह बाहर रखा जा रहा है। उनके अनुसार, जंतर-मंतर के उस आंदोलन से लगभग 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े हुए थे, लेकिन वर्तमान लीडरशिप में उन लोगों की न तो कोई सुनवाई हो रही है और न ही उन्हें प्रतिनिधित्व दिया गया है। ब्रह्मभट्ट का कहना है कि यह आंदोलन बिना किसी चेहरे के शुरू हुआ था, जिसे सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपनी मेहनत से सींचा था। अब जब इसे सफलता मिली है, तो यह कुछ चुनिंदा लोगों की जागीर बन गया है, जो कि गलत है।
नेतृत्व की तिकड़ी पर उठाए गंभीर सवाल
ब्रह्मभट्ट ने सीजेपी की शीर्ष लीडरशिप की तिकड़ी पर सीधे निशाने साधे हैं। आंदोलन के बाद बनी 3 सदस्यीय कोर टीम में अभिजीत दिपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रंका को सह-संयोजक का पद दिया गया था। ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि यही तीनों चेहरे मीडिया और सरकार के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि स्वयंसेवकों से किसी भी तरह की चर्चा किए बिना ही यह नेतृत्व थोपा गया है। ब्रह्मभट्ट ने बताया कि वे इस बारे में आशुतोष रंका से लगातार जवाब मांगते रहे लेकिन उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की, जिसके चलते उनकी और उनके साथी राहुल पांड्या की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
क्या सीजेपी बन गई है 'टीम केजरीवाल'?
मनीष ब्रह्मभट्ट ने संगठन पर अपनी सफलता को 'बेच देने' और राजनीति करने का बड़ा आरोप लगाया है। गुरुवार को अपनी नई पार्टी CJP-D के ऐलान के दौरान उन्होंने कहा कि यह आंदोलन देश की जनता का था, जिसे लोगों ने अपने खून-पसीने से सींचा था। ब्रह्मभट्ट ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सीजेपी अब पूरी तरह से 'टीम केजरीवाल' में तब्दील हो गई है। उनके दावों के अनुसार, दिपके और उनकी टीम ने बिना किसी मशविरे के 12 सदस्यीय कोर टीम का गठन किया, जिसमें से 8 सदस्यों के आम आदमी पार्टी से गहरे संबंध हैं।
इस दावे को बल तब मिलता है जब हम अगस्त माह की मीडिया रिपोर्ट्स पर गौर करें। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीजेपी की 12 सदस्यीय टीम में से 6 सदस्य या तो सीधे तौर पर आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं या उसका समर्थन करते आए हैं। हालांकि, अभिजीत दिपके ने इन आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे पहले आप से जुड़े जरूर थे, लेकिन अब उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सीजेपी किसी की 'बी टीम' नहीं है, बल्कि यह छात्रों की 'ए टीम' है। फिलहाल, सीजेपी के मुख्य नेताओं आशुतोष रंका और सौरव दास ने ब्रह्मभट्ट के इन नए आरोपों पर सार्वजनिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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