राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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कैलाश यात्रा के दौरान बढ़ा संकट
कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर गए 6 भारतीय नागरिक अब घर वापसी की राह पर हैं। तिब्बत के जिलोंग इलाके में आई भीषण बाढ़ के बाद ये लोग वहां फंस गए थे, लेकिन अब भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय के प्रयासों से उनकी निकासी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार, इन छह लोगों को अब नेपाल की सीमा के रास्ते भारत वापस लाने का काम जारी है। ये सभी नागरिक वर्तमान में जिलोंग से नेपाल बॉर्डर की दिशा में यात्रा कर रहे हैं।
स्वास्थ्य बिगड़ने से बढ़ी थी चिंता
इस ग्रुप में शामिल यात्रियों में से 4 लोग महाराष्ट्र से हैं, जबकि 2 यात्री दिल्ली के रहने वाले हैं। परिजनों से प्राप्त विवरण के मुताबिक, समूह की दो महिला सदस्य स्मिता पवार और योगिनी पाटिल की सेहत यात्रा के दौरान अचानक बिगड़ गई थी। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी होने के कारण उन्हें हाइपोक्सिया की समस्या हुई। इस स्थिति में उन्हें तुरंत जिलोंग शहर के चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उन्हें निरंतर ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी। समूह ने यह भी स्पष्ट किया था कि वहां की स्थानीय चिकित्सीय सुविधाएं उनकी नाजुक स्थिति के लिए काफी नहीं थीं, जिससे चिंता बढ़ गई थी।
बाढ़ ने कैसे रोकी वापसी की राह
यह पूरा दल वैध कैलाश मानसरोवर ग्रुप वीजा लेकर यात्रा पर निकला था और जिलोंग के एक होटल में रुका हुआ था। इसी दौरान क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने तबाही मचा दी। नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित इमिग्रेशन कार्यालय भी इस आपदा में पूरी तरह बह गया। प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने के कारण चीन से बाहर निकलने का मुख्य जमीनी रास्ता बंद हो गया था। मुसीबत में फंसे इन यात्रियों ने 26 अगस्त को भारतीय अधिकारियों को एक आपातकालीन संदेश भेजकर मदद मांगी। उन्होंने चीनी प्रशासन से समन्वय स्थापित करने और खराब स्वास्थ्य वाली महिलाओं को काठमांडू तक सीधे एयरलिफ्ट करने की गुहार लगाई थी।
राजनयिक स्तर पर तेज हुई कार्रवाई
भारतीय अधिकारियों ने इस संकट को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की। चीन में भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय ने सक्रियता दिखाते हुए चीनी अधिकारियों के साथ तत्काल बातचीत की। इसी का परिणाम है कि इन छह भारतीयों की सुरक्षित निकासी का रास्ता साफ हो सका। फिलहाल, उन्हें नेपाल के रास्ते भारत लाने की पूरी प्रक्रिया राजनयिक निगरानी में पूरी की जा रही है।
चीन में फंसे हैं और भी भारतीय
नेपाल और उसके आसपास के इलाकों में आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने कई तीर्थयात्रियों के सामने बड़ा संकट पैदा कर दिया है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल करीब 400 भारतीय नागरिक चीन में फंसे हुए हैं, जिनसे भारतीय मिशन लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। हालांकि, स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण है कि 320 लोगों से अभी भी संपर्क नहीं हो पाया है।
भारत सरकार के राजनयिक मिशन इस आपदा के समय में भारतीयों की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मान रहे हैं। चीनी और नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय बिठाकर हर संभव सहायता पहुंचाई जा रही है। विदेश मंत्रालय का मुख्य जोर उन नागरिकों तक जल्दी पहुंचने पर है जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता या आपातकालीन मदद की जरूरत है। प्रशासन लगातार प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों की कुशलक्षेम सुनिश्चित करने के लिए जुटा हुआ है।
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