क्राइम
एक घंटा पहले
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विचारों
भारत के आपराधिक इतिहास में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं जो दशकों बीत जाने के बाद भी पुलिस और कानून के लिए एक अनसुलझी पहेली बनी हुई हैं। ऐसा ही एक बेहद सनसनीखेज और रहस्यमयी मामला केरल से जुड़ा हुआ है, जो पूरे 42 साल बाद एक बार फिर देश की सबसे बड़ी चर्चाओं में शामिल हो गया है। यह कहानी है एक ऐसे शातिर अपराधी की, जिसने महज 8 लाख रुपये के बीमा क्लेम को हड़पने के लिए एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या कर दी और फिर खुद को मृत घोषित करने का नाटक रचा। इसके बाद वह कुछ इस तरह गायब हुआ कि आज तक पुलिस के हाथ खाली हैं। लेकिन अब, इस मामले में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है, जिसके तार झारखंड के बोकारो से लेकर सुदूर देश ब्रुनेई तक जुड़ते दिख रहे हैं।
एक पूर्व पुलिस अधिकारी का सनसनीखेज दावा
केरल पुलिस के इतिहास में सबसे लंबे समय तक फरार रहने वाले आरोपियों में से एक सुकुमार कुरुप को लेकर अब तक का सबसे बड़ा दावा किया गया है। जांच टीम का हिस्सा रह चुके और अब सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी अली अकबर ने दावा किया है कि सुकुमार कुरुप मरा नहीं है, बल्कि वह अपनी पहचान बदलकर विदेश में ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहा है। अली अकबर के अनुसार, कुरुप वर्तमान में ब्रुनेई में एक इंडो-मलेशियाई मूल के व्यक्ति की फर्जी पहचान के साथ रह रहा है।
सेवानिवृत्त अधिकारी ने केवल यह दावा ही नहीं किया, बल्कि इसके समर्थन में कुछ पुख्ता सबूत होने की बात भी कही है। उनके मुताबिक, कुरुप विदेशों में रह रहे अपनी पत्नी और अन्य करीबी रिश्तेदारों के लगातार संपर्क में है। इतना ही नहीं, अकबर का कहना है कि इतने लंबे समय तक कानून की गिरफ्त से बचे रहने के पीछे कुरुप के कुछ बेहद प्रभावशाली और बड़े राजनीतिक नेताओं के साथ गहरे संबंध रहे हैं। इन रसूखदार लोगों की मदद से वह समय-समय पर पुलिस की पहुंच से दूर भागने में सफल रहा। इस नए खुलासे ने केरल पुलिस और क्राइम ब्रांच के गलियारों में खलबली मचा दी है।
क्या थी 42 साल पुरानी वह खौफनाक वारदात?
इस पूरे मामले की गहराई और शातिराना साजिश को समझने के लिए हमें आज से ठीक 42 साल पीछे यानी साल 1984 में जाना होगा। पुलिस फाइलों के मुताबिक, सुकुमार कुरुप मुख्य रूप से अलाप्पुझा के कुट्टीचिरा के रहने वाले चाको नाम के एक व्यक्ति की हत्या का मुख्य आरोपी है। यह वारदात 22 जनवरी 1984 को अंजाम दी गई थी।
जांचकर्ताओं के अनुसार, सुकुमार कुरुप ने खुद के नाम पर कराई गई 8 लाख रुपये की जीवन बीमा की बड़ी राशि को अवैध तरीके से हासिल करने के लिए एक बेहद खतरनाक साजिश रची थी। इस साजिश के तहत कुरुप को खुद को मृत साबित करना था। इसके लिए उसने चाको को अगवा किया और उसकी हत्या कर दी। हत्या करने के बाद चाको के शव को एक कार में रखा गया और फिर उस कार को पूरी तरह से आग के हवाले कर दिया गया। कुरुप का इरादा दुनिया और बीमा कंपनी को यह विश्वास दिलाना था कि कार दुर्घटना में उसकी यानी सुकुमार कुरुप की मौत हो चुकी है।
शुरुआत में पुलिस को भी यह एक सामान्य हादसा लगा, लेकिन जब फोरेंसिक और गहन जांच शुरू हुई, तो सच्चाई सामने आ गई। पुलिस ने पाया कि कार में जला हुआ शव सुकुमार कुरुप का नहीं, बल्कि चाको का था। जैसे ही इस बीमा धोखाधड़ी और जघन्य हत्याकांड का खुलासा हुआ, कुरुप देश छोड़कर फरार हो गया। तब से लेकर आज तक पुलिस उसकी तलाश में देश-विदेश के कई कोनों की खाक छान चुकी है, लेकिन उसका कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
इंटरपोल की मदद लेगी केरल क्राइम ब्रांच
अली अकबर के इस ताजा और हैरान करने वाले दावे के बाद केरल क्राइम ब्रांच एक बार फिर से हरकत में आ गई है। क्राइम ब्रांच ने इस 42 साल पुराने मामले की नए सिरे से गहन पड़ताल करने का फैसला किया है। क्राइम ब्रांच के प्रमुख और ADGP एच. वेंकटेश ने इस संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस दावे की सच्चाई का पता लगाने के लिए पुलिस अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन यानी इंटरपोल से संपर्क करने की तैयारी कर रही है।
क्राइम ब्रांच के अनुसार, कुरुप के कथित पासपोर्ट विवरण, नए फोटोग्राफ और उसके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल फोन कनेक्शन की जानकारी हासिल करने के लिए इंटरपोल की मदद ली जाएगी। ADGP वेंकटेश ने स्पष्ट किया कि यदि इस नई जानकारी से कोई भी विश्वसनीय या ठोस सुराग मिलता है, तो मामले की एक विस्तृत और बड़े स्तर पर जांच शुरू की जाएगी। इसके अलावा, केरल के गृह मंत्री रमेश चन्निथला ने भी 28 अगस्त को इस मामले का संज्ञान लेते हुए ADGP वेंकटेश को इस नए दावे की तुरंत जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि चूंकि यह मामला कई दशकों से क्राइम ब्रांच की जांच के दायरे में है, इसलिए कुरुप के विदेश में छिपे होने के किसी भी नए इनपुट को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
झारखंड के बोकारो से जुड़ा रहस्यमयी कनेक्शन
इस पूरी कहानी में एक बेहद दिलचस्प मोड़ झारखंड के स्टील सिटी कहे जाने वाले बोकारो से भी जुड़ता है। दरअसल, करीब तीन महीने पहले ही केरल क्राइम ब्रांच ने पुराने और लंबित पड़े मामलों को निपटाने की अपनी नियमित प्रक्रिया के तहत इस केस की फाइल को दोबारा खोला था। उस दौरान पुलिस अधिकारियों का एक बड़ा वर्ग यह मानकर चल रहा था कि सुकुमार कुरुप अब इस दुनिया में नहीं है। इसके पीछे उसकी हृदय संबंधी गंभीर बीमारी को मुख्य कारण माना जा रहा था।
इस थ्योरी को बल देने के लिए पुलिस के पास एक अहम गवाह का बयान भी था। चेंगन्नूर की रहने वाली रत्नम्मा नाम की एक महिला ने दावा किया था कि उसने साल 1989 में झारखंड के बोकारो स्थित एक अस्पताल में सुकुमार कुरुप को देखा था। रत्नम्मा के अनुसार, उस समय वह बोकारो के उसी अस्पताल में नर्सिंग की छात्रा थीं। उन्होंने बताया था कि कुरुप को सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया था। रत्नम्मा ने दावा किया था कि उन्होंने ICU में कुरुप से सीधे बातचीत भी की थी और वह उसकी पहचान को लेकर पूरी तरह आश्वस्त थीं।
इस बयान के आधार पर पुलिस लंबे समय तक यह मानती रही कि साल 1989 के बाद किसी समय गंभीर हृदय रोग के कारण कुरुप की मृत्यु हो गई होगी। अगर आज वह जीवित भी है, तो उसकी उम्र लगभग 83 वर्ष हो चुकी होगी। पुलिस को इससे पहले कभी भी ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला था जिससे यह साबित हो सके कि कुरुप अपनी पत्नी या परिवार के किसी अन्य सदस्य के संपर्क में था।
अली अकबर की सौंपी तस्वीर की होगी जांच
अपने दावों को मजबूती देने के लिए पूर्व पुलिस अधिकारी अली अकबर ने मीडिया और जांच टीम को एक हालिया तस्वीर भी सौंपी है। उनका दावा है कि यह तस्वीर उसी सुकुमार कुरुप की है जो इस समय ब्रुनेई में छिपा हुआ है। हालांकि, केरल पुलिस प्रशासन ने अभी तक इस तस्वीर की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है।
अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे इस नई तस्वीर और इंटरपोल के जरिए मिलने वाले इनपुट के आधार पर इस 42 साल पुराने रहस्य का अंत कर पाएंगे? क्या वाकई सुकुमार कुरुप कानून को ठेंगा दिखाकर इतने दशकों से एक नई पहचान के साथ विदेशों में घूम रहा है, या फिर वह पहले ही इतिहास के पन्नों में दफन हो चुका है? इन सभी सवालों के जवाब अब क्राइम ब्रांच की आगामी अंतरराष्ट्रीय जांच पर टिके हुए हैं।
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