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एक घंटा पहले
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भयानक प्राकृतिक आपदा से दहला नेपाल
नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल पुलिस द्वारा साझा किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,344 तक पहुंच गई है। राहत और बचाव कार्य अभी भी युद्धस्तर पर जारी हैं, लेकिन 4,898 लोगों का अभी भी कोई सुराग नहीं मिल सका है।
मृतकों और लापता लोगों का विवरण
पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, बरामद किए गए 1,344 शवों में 489 पुरुष, 269 महिलाएं, 52 लड़के और 33 लड़कियां शामिल हैं। इसके अलावा 501 ऐसे शवों के अवशेष मिले हैं, जिनकी पहचान करना फिलहाल कठिन है। लापता लोगों की सूची भी काफी लंबी है, जिसमें 4,250 नेपाली नागरिक और 618 विदेशी शामिल हैं। लापता नेपालियों में 2,448 पुरुष और 482 महिलाएं हैं। अधिकारियों का कहना है कि 1,350 लोगों के लापता होने की सूचना उन्हें फोन कॉल के माध्यम से मिली है।
बचाव कार्य और राहत शिविर
बाढ़ के बीच से अब तक कुल 8,631 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इन जीवित बचाए गए लोगों में 7,387 नेपाली और 1,244 विदेशी नागरिक हैं। विस्थापित हुए 3,655 लोगों को सरकार द्वारा बनाए गए विभिन्न होल्डिंग सेंटरों में शिफ्ट किया गया है, जहां उन्हें जरूरी सहायता दी जा रही है।
शवों का प्रबंधन और पहचान की प्रक्रिया
प्रशासन ने अब तक 1,030 शवों का अंतिम संस्कार या दफनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए DNA सैंपलिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अब तक 1,260 मृतकों और 972 मृतकों के परिजनों के सैंपल लिए जा चुके हैं, यानी कुल 2,232 लोगों के DNA नमूने एकत्र हुए हैं। पहचान में न आ पाने वाले 1,270 लोगों का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया गया है ताकि परिजन उनकी शिनाख्त कर सकें।
तबाही की शुरुआत कैसे हुई?
इस विनाशकारी बाढ़ की शुरुआत 26 अगस्त 2026 को हुई थी। नेपाल और तिब्बत की सीमा के करीब लैंगटांग लिरुंग क्षेत्र में ग्लेशियर के गिरने या बर्फ और चट्टानों के अचानक ढहने से भोटेकोशी, त्रिशूली और आसपास की नदियों में जलस्तर अचानक बढ़ गया। इससे रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी जैसे जिले बुरी तरह प्रभावित हुए। इस आपदा के दौरान ही 9 दिनों तक सुरंग में फंसे रहने वाले एक व्यक्ति की कहानी भी चर्चा का विषय बनी थी, जिसने बताया कि उसने भगवान की प्रार्थना करते हुए अपनी जान बचाई और जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर वह सुरक्षित बाहर निकल आया।
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