उपनाम: देवउठनी ग्यारस
प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के दौर में भी जीवंत है करौली के हटवारा बाजार की लकड़ी कारीगरी
करौली का हटवारा बाजार आज भी पारंपरिक लकड़ी के खिलौनों और घरेलू वस्तुओं की पहचान बनाए हुए है, जो 10 से 20 परिवारों की आजीविका का सहारा हैं। महंगाई के बावजूद यहां 20 से 100 रुपये तक के हस्तनिर्मित खिलौने उपलब्ध हैं।
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2 घंटे पहले