उपनाम: ठठेरी कला
जयपुर के ठठेरों के रास्ते में आज भी सांस ले रही 300 साल पुरानी कला, मगर मांग घटने से छिना रोजगार
जयपुर की चारदीवारी में बसे ठठेरों के रास्ते में आज भी तांबे, पीतल और कांसे के हाथ से बने बर्तन तैयार होते हैं, लेकिन बाजार में घटती मांग ने कारीगरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है।
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3 दिन पहले