उपनाम: राजस्थान इतिहास
1857 की क्रांति के महानायक सार्दुलसिंह देवड़ा, जिन्हें आज लोकदेवता के रूप में पूजते हैं लोग
सिरोही जिले के रोवाड़ा गांव के रहने वाले सार्दुलसिंह देवड़ा ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे। आज उन्हें जुजार बावसी के रूप में सिरोही, जालोर और पाली के इलाकों में श्रद्धा के साथ पूजा जाता है।
बीकानेर का अनूठा इतिहास: जहाँ राजा नहीं, भगवान लक्ष्मीनाथ को माना जाता था राज्य का वास्तविक शासक
बीकानेर रियासत की एक गौरवशाली परंपरा रही है, जिसमें यहां के राठौड़ शासकों ने स्वयं को राजा मानने के बजाय भगवान लक्ष्मीनाथ का सेवक माना। राज्य की सत्ता का वास्तविक स्वामी भगवान लक्ष्मीनाथ को ही माना जाता था और इसी मान्यता के साथ यहां शासन का संचालन किया जा...
Sojat Fort: मेहरानगढ़ और आमेर से भी पुराना है राजस्थान का यह किला, एक राजकुमारी के नाम से जुड़ा है इसका रहस्यमयी इतिहास
राजस्थान के पाली जिले में स्थित Sojat Fort अपनी प्राचीन विरासत के लिए मशहूर है। इस किले का नाम राजा त्रवणसेन की पुत्री राजकुमारी सेजल के नाम पर पड़ा था।
भीनमाल: महाकवि माघ की जन्मभूमि और ‘शिशुपालवध’ की अमर साहित्यिक विरासत
राजस्थान का भीनमाल, जो प्राचीन काल में ‘श्रीमाल’ कहलाता था, संस्कृत साहित्य का बड़ा केंद्र रहा है। यहीं जन्मे महाकवि माघ की रचना ‘शिशुपालवध’ आज भी देश-विदेश के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है।
सीकर के रायपुरा की अनूठी दास्तान, सात पीढ़ियों तक रहा ब्राह्मणों का दबदबा, उजड़ने के बाद फिर से आबाद हुआ गांव
सीकर जिले के पलसाना ब्लॉक का रायपुरा गांव करीब 400 साल पुराना ऐतिहासिक गांव है, जिसकी बसावट दो बार हुई। पहले यहां ब्राह्मण समाज का प्रभाव रहा और बाद में संवत 1817 में राजपूतों व जाट समाज के सहयोग से इसे दोबारा बसाया गया।
जब सड़कों पर कारें नहीं दौड़ती थीं, जोधपुर के बाजारों में बजती थीं ऊंटों की घंटियां, पढ़िए मारवाड़ी व्यापार की कहानी
जोधपुर के घंटाघर, सरदार मार्केट और सोजती गेट कभी ऊंटों के काफिलों से गुलजार रहते थे, जब यही जानवर मारवाड़ में व्यापार और आवागमन की रीढ़ हुआ करते थे।