उपनाम: राजपूताना
लोकगीत के पीछे छिपा राजपूताना का अद्भुत इतिहास: जानिए 'आगे-आगे कोतल घोड़लो' का मतलब
राजस्थान का चर्चित लोकगीत 'आगे-आगे कोतल घोड़लो' महज मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह मारवाड़ की एक चतुर युद्धनीति को दर्शाता है।
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2 महीने पहले
आगे-आगे कोतल घोड़लो: 600 घोड़ों के सौदे और युद्ध की अनोखी कहानी में छिपी है ऐतिहासिक कूटनीति
राजस्थान का प्रसिद्ध लोकगीत 'आगे-आगे कोतल घोड़लो' महज एक गीत नहीं, बल्कि महाराजा अभय सिंह की उस चतुर युद्धनीति का प्रतीक है, जिसने ढोल की थाप से जयपुर की सेना को मात दी थी।
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2 महीने पहले