उपनाम: पारंपरिक ज्ञान
बिना तकनीक, बिना यंत्र: पुराने जमाने में कैसे होता था बारिश का अनुमान, जो आज भी निकलता है सच
मौसम विभाग और मोबाइल अलर्ट से पहले गांव के लोग पशु-पक्षियों, कीट-पतंगों और बादलों के व्यवहार को देखकर बारिश का सटीक अनुमान लगा लेते थे। सागर जिले के 90 वर्षीय बुजुर्ग इस पुरानी परंपरा को याद करते हैं।
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एक महीने पहले
बिना इंटरनेट और मौसम ऐप के भी सही बता देते हैं बारिश का दिन, सरगुजा के किसानों की सदियों पुरानी देसी पहचान
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में किसान आज भी चींटियों की हलचल, जंगलों की गहरी हरियाली और सांप-बिच्छुओं की सक्रियता जैसे प्राकृतिक संकेतों से मानसून के आगमन का अनुमान लगाते हैं और इन्हीं के आधार पर खेती की शुरुआत करते हैं।
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एक महीने पहले