उपनाम: लोक कला
देहरादून के रामचरण जुयाल: 1980 से लोक वाद्य यंत्रों की धुन को जीवित रखने की अनोखी कोशिश
उत्तराखंड के 68 वर्षीय सेवानिवृत्त पीडब्ल्यूडी कर्मचारी रामचरण जुयाल अपनी कला के जरिए बिनाई और हुड़का जैसी लुप्तप्राय वाद्य परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में जुटे हैं। उन्होंने नरेंद्र सिंह नेगी जैसे दिग्गजों के साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उत्तराखंड...
बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान: 50 साल पूरे करने वाला छतरपुर आकाशवाणी केंद्र बना कलाकारों की धड़कन
मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित आकाशवाणी केंद्र ने 50 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह केंद्र न केवल 13 जिलों में अपनी आवाज पहुंचा रहा है, बल्कि बुंदेली कला और संस्कृति को संजोकर उसे नई पहचान भी दिला रहा है।
मुजफ्फरपुर: श्मशान घाट पर चलती 'अपन पाठशाला' में बच्चे सीख रहे मिथिला पेंटिंग, हुनर से बन रहे आत्मनिर्भर
मुजफ्फरपुर के एक श्मशान घाट परिसर में चल रही 'अपन पाठशाला' के बच्चे न केवल स्कूली शिक्षा ले रहे हैं, बल्कि मिथिला पेंटिंग के जरिए अपनी कला को भी निखार रहे हैं। यह पहल बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही पारंपरिक संस्कृति से भी जोड़ रही है।
राजस्थान के इस गांव में मिट्टी से बनते हैं चमत्कारिक घोड़े, मन्नत पूरी होने पर उमड़ती है भीड़
जालौर जिले के हरजी गांव में पिछले 60 वर्षों से मामाजी के मिट्टी के घोड़े बनाने की अद्भुत परंपरा निभाई जा रही है। श्रद्धालु अपनी मुरादें पूरी होने पर आस्था के प्रतीक के रूप में इन घोड़ों को मंदिरों में अर्पित करते हैं।