चिराग पासवान की बदलती राजनीति: क्या एनडीए के लिए नई चुनौती बन रहे हैं लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष?
राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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विचारों
बदलते तेवर और तीखे बयान
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान इन दिनों सुर्खियों में हैं। उनके हालिया टीवी साक्षात्कारों और सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयानों ने राजनीतिक जानकारों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या चिराग पासवान का मन अब एनडीए से भर गया है या वे गठबंधन के भीतर अपनी एक नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार सरकार को लेकर उनके 'शर्म वाले बयान' और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक भविष्य को लेकर की गई टिप्पणियां उनके बगावती तेवरों की ओर संकेत कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश में बढ़ती सक्रियता
चिराग पासवान ने अचानक अपना ध्यान बिहार से हटाकर उत्तर प्रदेश की ओर केंद्रित कर दिया है। लखनऊ के बाद प्रयागराज में सम्मेलनों का आयोजन करना यह दर्शाता है कि वे यूपी चुनाव 2027 को लेकर गंभीर रणनीति बना रहे हैं। जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर चिराग एक बड़ा संदेश देना चाहते हैं। वे सीधे तौर पर सत्ता के केंद्र को चुनौती देने की मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं, जिसे सियासी भाषा में शेर की मांद में घुसने जैसा माना जा रहा है।
क्या नए मौसम वैज्ञानिक बनने की तैयारी है?
बिहार की राजनीति में 'मौसम वैज्ञानिक' का तमगा पहले रामविलास पासवान के नाम रहा है, जो हवा के रुख को भांपने में माहिर थे। अब जिस तरह चिराग पासवान अपनी चालें चल रहे हैं, उससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या वे अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए राजनीति के नए 'मौसम वैज्ञानिक' बनने की राह पर हैं।
- बिहार सरकार पर लगातार दबाव बनाना।
- उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को साधना।
- विपक्ष के बजाय अपने ही गठबंधन के भीतर रहकर मुखर होना।
- सार्वजनिक मंचों से अपनी अलग पहचान कायम करना।
चिराग पासवान के इन कदमों के पीछे का असली उद्देश्य क्या है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन उनके वर्तमान आक्रामक तेवर निश्चित रूप से एनडीए के भीतर एक बड़ी हलचल पैदा कर रहे हैं।
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