जानिए जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना कौन हैं, जिन्होंने जेपीएससी मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया? राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की बेंच से जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना ने हटने का फैसला किया है। इसकी वजह उनका पूर्व में वकालत के दौरान इस मामले से जुड़ा होना है।

जेपीएससी मामले से जुड़ी बेंच बदली

झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी से जुड़े एक बेहद चर्चित मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट की एक नई बेंच के समक्ष होगी। इस मामले की सुनवाई के दौरान उस समय एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। अदालत को यह जानकारी दी गई कि जस्टिस मोहना ने अपने वकालत के दिनों में इस कानूनी विवाद से जुड़े कुछ पक्षकारों की ओर से पैरवी की थी। मामले की निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए बेंच में यह बदलाव अनिवार्य हो गया था। अब यह मामला आगामी 5 अक्टूबर को एक दूसरी बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

छात्रों की क्या है मांग

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत के समक्ष अपनी कुछ महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे विवाद के बीच छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई या जबरन कार्यवाही न की जाए। इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि इस पूरे मामले से जुड़ी हुई सभी एफआईआर को अदालत के रिकॉर्ड पर लाया जाए ताकि मामले की स्पष्टता बनी रहे। अब सभी की निगाहें अगली तारीख यानी 5 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब अदालत इस पर कोई निर्देश दे सकती है।

क्यों बदली गई बेंच?

किसी भी न्यायिक प्रक्रिया में हितों का टकराव एक महत्वपूर्ण विषय होता है। जब यह स्पष्ट हुआ कि जस्टिस मोहना अतीत में वकालत के दौरान इस विशेष मामले से संबंधित पक्षकारों के लिए पेश हो चुकी थीं, तो उन्होंने खुद को सुनवाई से हटा लेना ही उचित समझा। कानून के जानकारों का मानना है कि न्यायिक शुचिता बनाए रखने के लिए इस तरह के फैसले अक्सर लिए जाते हैं, ताकि सुनवाई के परिणाम पर किसी भी तरह का कोई संदेह न पैदा हो सके।

कौन हैं जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना?

जस्टिस वेंकिटा सुब्रमणि मोहना हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की जज के रूप में पदस्थ हुई हैं और जेपीएससी मामले की वजह से वह चर्चा के केंद्र में हैं। केंद्र सरकार ने जून 2026 में उनकी नियुक्ति को आधिकारिक मंजूरी प्रदान की थी। न्यायिक इतिहास में उनका स्थान इसलिए भी खास है क्योंकि वह सीधे बार (वकालत) से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाली दूसरी महिला वकील हैं। उनसे पहले 2018 में जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने यह गौरव प्राप्त किया था।

जीवन का संघर्ष और प्रेरणादायक सफर

जस्टिस मोहना का व्यक्तिगत जीवन और उनका संघर्ष काफी प्रेरणादायक रहा है। उनका जन्म तमिलनाडु के पोल्लाची में हुआ था। वह 13 भाई-बहनों के एक बड़े परिवार में पली-बढ़ीं। उनके पिता एक वरिष्ठ एंटोमोलॉजिस्ट थे, जिन्होंने तमिलनाडु सरकार में अपनी सेवाएं दी थीं और उससे पहले वे सेना में भी कार्यरत थे। उनके घर का माहौल अनुशासन और शिक्षा को समर्पित था। हालांकि उनकी माता जी ने बहुत अधिक औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की थी, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी के अंदर छिपी हुई बोलने की कला और बहस करने की प्रतिभा को बहुत पहले ही पहचान लिया था। उन्होंने जस्टिस मोहना को कानून की पढ़ाई करने के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया।

कानूनी शिक्षा के शुरुआती दिन

जस्टिस मोहना ने 1983 में देश में शुरू हुए शुरुआती पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड बीए एलएलबी कार्यक्रम के पहले बैच में दाखिला लेने का गौरव हासिल किया। उन्होंने कोयंबटूर लॉ कॉलेज से अपनी कानून की शिक्षा पूरी की। वह दौर संसाधनों के मामले में काफी चुनौतीपूर्ण था। उस समय लॉ कॉलेज के पास अपनी इमारतें तक नहीं हुआ करती थीं और कक्षाएं किराए की जगहों पर संचालित की जाती थीं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने 1988 में अपनी कानून की पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की और उसके बाद वकालत के कठिन क्षेत्र में अपने करियर की नींव रखी।

सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

वर्षों तक अथक परिश्रम करने के बाद, उन्हें 2015 में वरिष्ठ अधिवक्ता के सम्मानजनक पद से नवाजा गया। इसके बाद 2026 में उन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त कर दिया गया। एक रोचक तथ्य यह भी है कि उनके साथ पढ़ने वाले छात्रों में केवी विश्वनाथन भी शामिल थे, जो आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रहे और बाद में उन्हें भी सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया गया।

अब आगे क्या?

जेपीएससी मामले में बेंच के बदलने के बाद अब पूरी कानूनी प्रक्रिया नई दिशा में आगे बढ़ेगी। 5 अक्टूबर की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। इस दिन अदालत यह स्पष्ट कर सकती है कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए क्या निर्देश जारी किए जाएंगे और जेपीएससी से संबंधित इस पूरे कानूनी विवाद का भविष्य क्या होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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