उत्तर प्रदेश
3 घंटे पहले
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राज्यसभा चुनाव के बाद बढ़ी सियासी तपिश
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज हो गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने राज्यसभा चुनावों के दौरान एक बड़ा बयान देकर प्रदेश की राजनीति में फिर से हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के परिणामों को आगामी विधानसभा चुनाव का एक स्पष्ट संकेत बताते हुए राजनीतिक बहस को नई दिशा देने की कोशिश की है। उनके इस बयान के बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई अन्य विपक्षी नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। इस राजनीतिक वाकयुद्ध में समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क के साथ-साथ एआईएमआईएम ने भी योगी सरकार पर तीखे हमले किए हैं और इसे वोटों के ध्रुवीकरण की रणनीति करार दिया है।
योगी आदित्यनाथ का 80 बनाम 20 का दांव
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया में सभी उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। इनमें भारतीय जनता पार्टी के 8 और समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवार शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुनः 80 बनाम 20 का चर्चित जुमला इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश का 80 प्रतिशत हिस्सा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ खड़ा है, जबकि 20 प्रतिशत लोग पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग के साथ हैं। योगी आदित्यनाथ का यह बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की पीडीए रणनीति को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव का कटाक्ष: पीडीए की माला जपने की सलाह
योगी आदित्यनाथ के इस बयान पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के भाषण का एक अंश साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को हर समय पीडीए ही दिखाई देता है, इसलिए उन्हें 108 मनकों की माला बनवाकर उस पर पीडीए लिखवा लेना चाहिए और उसका लगातार जाप करना चाहिए। अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां पीडीए वर्ग के दमन को बढ़ावा देने वाली हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के शब्दों से यह साफ झलकता है कि आने वाले समय में भी पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का दौर थमने वाला नहीं है।
लोकसभा चुनाव का प्रभाव और राजनीतिक समीकरण
अपनी तीखी प्रतिक्रिया में अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ के बयान को 2024 के लोकसभा चुनावों से जोड़कर देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली करारी हार ने प्रदेश का पूरा राजनीतिक संतुलन बिगाड़ कर रख दिया है। अखिलेश के अनुसार, उसी हताशा में मुख्यमंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं। उनका मानना है कि बीजेपी के भीतर की यह बेचैनी पीडीए वर्ग के प्रति उनकी नफरत को और अधिक उजागर कर रही है, जिससे समाज में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
जिया उर रहमान बर्क का दावा, जीत का समीकरण बदलेगा
समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क ने भी योगी आदित्यनाथ को आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्यसभा चुनाव में सीटों की संख्या के आधार पर बीजेपी भले ही अपनी जीत का दावा कर रही हो, लेकिन मुख्यमंत्री को इसे अपनी अंतिम जीत नहीं समझना चाहिए। बर्क ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के मतदाता 10 वर्षों से मंदिर और मस्जिद के नाम पर हो रही राजनीति से पूरी तरह ऊब चुके हैं। उन्होंने कहा कि जनता अब एकजुट हो चुकी है और आने वाले विधानसभा चुनावों में यह समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा।
एआईएमआईएम का आरोप: ध्रुवीकरण की राजनीति का विफल प्रयास
इस सियासी विवाद में एआईएमआईएम भी पीछे नहीं रही। पार्टी के सेंट्रल उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री के बयानों को समाज को बांटने वाली राजनीति का हिस्सा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की बयानबाजी केवल मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने और अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा से दूर रखने का एक सुनियोजित प्रयास है। सिद्दीकी ने जोर देकर कहा कि मुस्लिम समुदाय अब इन दांव-पेंचों को समझ चुका है और आने वाले समय में अपने वोट के माध्यम से धर्म की राजनीति करने वालों को करारा सबक सिखाएगा।
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