मध्य प्रदेश
एक दिन पहले
9
विचारों
भारत इस वर्ष अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। देश के कोने-कोने में इसे लेकर विशेष उत्साह का माहौल बना हुआ है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि भारत की आजादी के लिए आखिरकार 15 अगस्त की तारीख को ही क्यों चुना गया था? इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तारीख के चयन के पीछे मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ी एक बेहद ही रोचक और प्रामाणिक कहानी है। यह कहानी देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद और उज्जैन के एक महान ज्योतिषाचार्य के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्होंने ग्रहों और नक्षत्रों की चाल को भांपकर भारत के भविष्य की मजबूत नींव रखने में मदद की थी।
आजादी की तारीख और शुभ मुहूर्त की खोज
जब देश आजाद होने की कगार पर था, तब सत्ता के हस्तांतरण के लिए उपयुक्त समय और तारीख की खोज शुरू हुई। देश के होने वाले प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ज्योतिष विद्या और भारतीय संस्कृति में गहरी आस्था रखते थे। वे चाहते थे कि देश की आजादी एक ऐसे शुभ मुहूर्त में हो जो स्वतंत्र भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव रख सके। इसके लिए उन्होंने अपने विश्वसनीय गोस्वामी गणेश दत्त महाराज के जरिए उज्जैन के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य और प्रकांड विद्वान पंडित सूर्यनारायण व्यास को दिल्ली आमंत्रित किया था।
उस समय ब्रिटिश हुकूमत ने भारत के नेताओं के सामने सत्ता हस्तांतरण के लिए मुख्य रूप से 14 अगस्त और 15 अगस्त की तारीखों का विकल्प रखा था। पंडित सूर्यनारायण व्यास ने पंचांग का बारीकी से अध्ययन किया और ग्रह-नक्षत्रों की गहन ज्योतिषीय गणना की। उन्होंने पाया कि 14 अगस्त को अस्थिर लग्न पड़ रहा था, जो नए राष्ट्र की स्थिरता के लिए बिलकुल भी अनुकूल नहीं था। इसके विपरीत, उन्होंने 15 अगस्त की तारीख को बेहद शुभ और मंगलकारी पाया। यही कारण था कि उनकी सलाह पर अंततः 15 अगस्त को भारत की आजादी के लिए निश्चित किया गया।
आधी रात को तिरंगा फहराने और संसद के शुद्धिकरण की वजह
पंडित सूर्यनारायण व्यास के सुपुत्र, जाने-माने लेखक और दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक राजशेखर व्यास ने इस ऐतिहासिक घटनाक्रम से जुड़े कई अहम खुलासे किए हैं। उनके अनुसार, पंडित सूर्यनारायण व्यास ने आजादी के शुभ मुहूर्त की गणना करने के बाद डॉ. राजेंद्र प्रसाद को कुछ विशेष सलाह दी थीं:
- आधी रात को ध्वजारोहण: चूंकि स्वतंत्रता का क्षण ठीक आधी रात को आ रहा है, इसलिए औपचारिक रूप से ध्वजारोहण का कार्यक्रम मध्यरात्रि में ही किया जाना चाहिए।
- सुबह अन्य समारोह: आजादी से जुड़े बाकी के अन्य उत्सव और समारोह अगली सुबह आयोजित किए जा सकते हैं।
- संसद भवन का शुद्धिकरण: स्वतंत्र भारत की नई शुरुआत को पवित्र बनाने के लिए संसद भवन का रात में ही जल से शुद्धिकरण कराया जाए।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इन सभी बहुमूल्य सलाहों को सहर्ष स्वीकार कर लिया। इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी इस पर सहमति जताई और उन्होंने भारतीय समयानुसार आधी रात को ही लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा फहराकर देश की आजादी की घोषणा की। संसद भवन को भी पंडित व्यास के सुझाव के अनुसार रात में ही पवित्र जल से शुद्ध किया गया था, ताकि किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नए राष्ट्र पर न पड़े।
पंडित सूर्यनारायण व्यास का जीवन और उनकी अचूक भविष्यवाणियां
उज्जैन की पावन धरती पर वर्ष 1902 में जन्मे पंडित सूर्यनारायण व्यास केवल एक ज्योतिषाचार्य ही नहीं थे, बल्कि वे एक प्रखर लेखक और देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले एक सक्रिय क्रांतिकारी भी थे। उन्होंने वर्ष 1921 से ही महात्मा गांधी के आह्वान पर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेना प्रारंभ कर दिया था। उनकी ज्योतिषीय गणनाएं इतनी अचूक थीं कि उन्होंने वर्ष 1930 में ही यह भविष्यवाणी कर दी थी कि भारत को वर्ष 1947 के अगस्त महीने में पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त होगी।
पंडित व्यास ने देश की आजादी के साथ-साथ यह भी भविष्यवाणी की थी कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद ही आजाद भारत के पहले राष्ट्रपति बनेंगे। इसके बाद, वर्ष 1952 में जब दोबारा राष्ट्रपति चुनाव होने वाले थे, तब भी पंडित व्यास ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद के फिर से देश के राष्ट्रपति चुने जाने की सटीक भविष्यवाणी की थी। जब यह भविष्यवाणी पूरी तरह से सच साबित हुई, तो राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्वयं पंडित व्यास को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस बात की पुष्टि की थी और उनकी विद्वता की सराहना की थी।
पाकिस्तान का 14 अगस्त चुनना और अस्थिरता की भविष्यवाणी
भारत की स्वतंत्रता और विभाजन के उस नाजुक दौर में पंडित सूर्यनारायण व्यास ने दोनों नवगठित होने वाले देशों के लिए ज्योतिषीय मुहूर्त का बहुत गहराई से अध्ययन किया था। सूत्रों और ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, उन्होंने चेतावनी दी थी कि 14 अगस्त को पाकिस्तान का गठन होने से वहां हमेशा अस्थिरता का माहौल बना रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, उस दिन मेष लग्न बन रहा था और गुरु की स्थिति भी अनुकूल नहीं थी, जो किसी नए राष्ट्र के सुचारू संचालन और सुख-शांति के लिए शुभ संकेत नहीं था।
पंडित व्यास ने इस संबंध में आगाह किया था कि इस खराब मुहूर्त के कारण पाकिस्तान में लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता बनी रह सकती है। हालांकि, पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ज्योतिष, मुहूर्त और भारतीय पंचांग जैसी पद्धतियों में बिल्कुल भी विश्वास नहीं रखते थे, इसलिए उन्होंने इस चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए 14 अगस्त को ही अपना स्थापना दिवस चुना। इसके विपरीत, जिन्ना की पत्नी रतनबाई पंडित सूर्यनारायण व्यास की ज्योतिषीय विद्या और उनकी भविष्यवाणियों पर गहरी आस्था रखती थीं। अंततः इतिहास गवाह है कि पंडित व्यास की वह भविष्यवाणी आज भी कितनी सच साबित हो रही है।
Comments
0 comment