तकनीक
एक घंटा पहले
4
विचारों
टैरिफ बढ़ोतरी पर स्पष्टीकरण
मोबाइल रिचार्ज के दाम बढ़ने की चर्चाओं के बीच दूरसंचार क्षेत्र के नियामक TRAI यानी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने अपनी स्थिति साफ कर दी है। हाल ही में मीडिया के साथ हुई एक विशेष बातचीत में TRAI के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने इस बात पर जोर दिया कि नियामक किसी भी तरह के कयासों या बाजार में चल रही अटकलों के आधार पर कोई फैसला नहीं लेगा।
क्या 10-15 प्रतिशत तक बढ़ेंगे दाम
जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि यदि टेलीकॉम कंपनियां मोबाइल टैरिफ में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लेती हैं, तो क्या नियामक इसमें हस्तक्षेप करेगा, तो अनिल कुमार लाहोटी ने स्पष्ट किया कि TRAI केवल अनुमानों के आधार पर कोई कार्रवाई करने के लिए बाध्य नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भविष्य में किसी भी समय उन्हें लगा कि बाजार की स्थितियों के कारण हस्तक्षेप करना अनिवार्य है, तो प्राधिकरण निश्चित रूप से उस दिशा में कदम उठाएगा। फिलहाल के लिए, इन आंकड़ों के साथ होने वाली बढ़ोतरी पर नियामक की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या मंजूरी नहीं दी गई है।
टैरिफ तय करने की वर्तमान प्रक्रिया
TRAI चेयरमैन ने बताया कि भारत में दूरसंचार सेवाएं वर्तमान में टैरिफ फॉरबियरेंस व्यवस्था के अंतर्गत काम कर रही हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि मोबाइल कंपनियों को अपनी सेवाओं की कीमतें स्वयं निर्धारित करने की पूरी आजादी है। कंपनियों के बीच बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा है, जिसके चलते वे अपने विभिन्न प्लान्स की कीमत और उनमें दी जाने वाली सुविधाओं को तय करती हैं ताकि अधिक से अधिक ग्राहकों को अपने साथ जोड़ सकें। नियामक की मुख्य भूमिका इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बाजार पर कड़ी नजर रखने और यह सुनिश्चित करने की है कि सभी नियम पूरी तरह से लागू हों।
भारत में टैरिफ की स्थिति
भारतीय टेलीकॉम बाजार का जिक्र करते हुए अनिल कुमार लाहोटी ने यह भी माना कि भारत में मोबाइल टैरिफ दरें संभवतः दुनिया भर में सबसे कम हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता वैश्विक बाजारों की तुलना में काफी कम लागत पर मोबाइल और डेटा सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। हालांकि, यदि कंपनियां आने वाले समय में टैरिफ में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करती हैं, तो इसका सीधा असर आम जनता के मासिक मोबाइल बिल पर पड़ना तय है। यही कारण है कि रिचार्ज महंगे होने की खबरों पर देशभर के ग्राहकों की नजरें टिकी हुई हैं। TRAI का रुख यह स्पष्ट करता है कि कंपनियां व्यावसायिक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन नियामक सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए हमेशा सतर्क है।
Comments
0 comment