तेलंगाना का बंदापालेम: जहां 70 साल से पूरी तरह प्रतिबंधित है शराब, नशा मुक्त जीवन बना पहचान राष्ट्रीय राजनीति 4 घंटे पहले 5
तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में स्थित बंदापालेम गांव सात दशकों से एक अनूठी मिसाल कायम किए हुए है, जहां कड़े सामाजिक नियमों के चलते शराब पूरी तरह वर्जित है। इस पहल से गांव में न केवल आपसी विवाद खत्म हुए हैं, बल्कि परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

सूर्यापेट के बंदापालेम में दशकों से कायम है शांति

तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में एक ऐसा गांव है जो अपनी सामाजिक एकजुटता और कड़े अनुशासन के लिए पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। बंदापालेम नाम का यह गांव पिछले 70 वर्षों से एक ऐसी व्यवस्था का पालन कर रहा है, जो आज के समय में कल्पना से परे लगती है। यहां पिछले सात दशकों से शराब की न तो बिक्री होती है और न ही कोई इसका सेवन करता है। इस लंबे समय से जारी नशाबंदी ने गांव की तस्वीर बदल दी है, जहां शराब के कारण होने वाली घरेलू हिंसा या आपसी कलह जैसी घटनाएं लगभग शून्य हो चुकी हैं।

परंपरा और ग्रामीणों का संकल्प

बंदापालेम के अधिकांश निवासी छोटे किसान और खेतिहर मजदूर हैं। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा उनके पूर्वजों द्वारा शुरू की गई थी। उस दौर में ग्रामीणों ने यह स्पष्ट समझ लिया था कि शराब न केवल व्यक्ति की मेहनत की कमाई को नष्ट करती है, बल्कि यह परिवारों को भीतर से खोखला कर देती है और गांव के सामाजिक ताने-बाने को बिगाड़ देती है। इसी दूरदर्शी सोच के साथ गांव के लोगों ने मिलकर शराब से दूरी बनाने का संकल्प लिया, जो आज भी पूरी निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है।

कड़ा विरोध और महिलाओं की भूमिका

इस गांव में शराब के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है। अतीत में जब भी किसी शराब माफिया या बाहरी व्यक्ति ने गांव में दुकान खोलने या अवैध रूप से शराब बेचने की कोशिश की, तो पूरे गांव ने एकजुट होकर उसका पुरजोर विरोध किया। इस संघर्ष में गांव की महिलाओं की भूमिका सबसे अहम रही है। महिलाओं ने न केवल शराब की भट्ठियों को नष्ट किया, बल्कि शराब से जुड़े बर्तनों को तोड़कर बेचने वालों को गांव से खदेड़ने में मुख्य भूमिका निभाई। उनकी इस दृढ़ता ने बाहरी तत्वों के हौसले पस्त कर दिए।

गांव के सख्त नियम और दंड का प्रावधान

पंचायत द्वारा बनाए गए नियम इतने कड़े हैं कि कोई भी इनका उल्लंघन करने की हिम्मत नहीं करता। गांव के भीतर यदि कोई व्यक्ति शराब बेचते या सेवन करते पकड़ा जाता है, तो उस पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा, सामाजिक बहिष्कार का डर भी लोगों को दायरे में रखता है। नियम इतने सख्त हैं कि यदि गांव का कोई निवासी किसी दूसरे कस्बे या शहर से शराब पीकर लौटता है, तो उसे गांव की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति तक नहीं दी जाती है। यह सामाजिक नियंत्रण ही इस गांव की सबसे बड़ी ताकत है।

खुशहाल समाज का जीता-जागता उदाहरण

बंदापालेम गांव का यह सामूहिक अनुशासन अन्य क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा है। इसका सकारात्मक परिणाम यह है कि गांव में पुलिस को हस्तक्षेप करने या कानून-व्यवस्था संभालने की जरूरत ही नहीं पड़ती। शराब पर व्यर्थ होने वाली राशि अब परिवारों की बुनियादी जरूरतों, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च की जाती है। ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में आए सुधार ने यह साबित कर दिया है कि यदि समाज मिलकर ठान ले, तो नशामुक्त और खुशहाल जीवन जीना न केवल संभव है, बल्कि यह विकास का सबसे सरल मार्ग भी है। बंदापालेम आज न केवल तेलंगाना, बल्कि पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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