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एक घंटा पहले
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चेन्नई में बुलाई गई आपात बैठक
चेन्नई स्थित डीएमके के मुख्य कार्यालय अन्ना अरिवलयम में आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया है। पार्टी अध्यक्ष और एम. के. स्टालिन इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें डीएमके के सभी सांसद शामिल होंगे। चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पार्टी का सख्त रुख रहेगा। यह बैठक दिल्ली में इंडिया गठबंधन के सांसदों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों के बाद बुलाई गई है, जो इस मुद्दे पर पार्टी की आगे की रणनीति के लिए काफी अहम मानी जा रही है।
संवैधानिक मर्यादाओं पर कनिमोझी का हमला
डीएमके की वरिष्ठ नेता और संसदीय दल की प्रमुख कनिमोझी ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार देश के संवैधानिक मूल्यों को निरंतर कमजोर करने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से इंडिया गठबंधन के सांसदों को निशाना बनाया जा रहा है, वह लोकतंत्र के लिए खतरा है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि एसआईआर को लेकर डीएमके ने जो चिंताएं जताई थीं, उन पर चुनाव आयोग ने कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाए हैं। आज की बैठक में स्टालिन इस बात पर अंतिम निर्णय ले सकते हैं कि चुनाव आयोग के प्रति डीएमके अपना विरोध किस रूप में और कितनी आक्रामकता के साथ आगे बढ़ाएगी।
सोशल मीडिया पर स्टालिन की दो टूक
एम. के. स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखा संदेश जारी करते हुए केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके और आइसा प्रमुख नेहा बोरा की गिरफ्तारी पर नाराजगी जाहिर की है। स्टालिन ने मांग की है कि इन दोनों नेताओं को अविलंब रिहा किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बलपूर्वक दबाने का प्रयास गैर-कानूनी और अमानवीय है। स्टालिन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आंदोलन को कुचलने की हर कोशिश उसे और अधिक शक्तिशाली ही बनाएगी। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन के दौरान इन नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिया था।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ी डीएमके
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाए जाने की मांग को लेकर स्टालिन अब पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार के पास ज्ञानेश कुमार को हटाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है। डीएमके का मानना है कि चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी एसएसआर प्रक्रिया विपक्षी दलों की आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है। पार्टी का आरोप है कि पूर्व में एसआईआर के तहत बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए थे, जिससे नाराज विपक्ष को शांत करने के लिए अब यह नया नाटक किया जा रहा है।
क्या है चुनाव आयोग का आगामी एसएसआर कार्यक्रम?
चुनाव आयोग ने देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसएसआर प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। इसके मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:
- पात्रता तिथि: 1 जनवरी 2027 निर्धारित की गई है।
- प्रक्रिया की शुरुआत: 12 नवंबर को मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ यह प्रक्रिया शुरू होगी।
- दावे और आपत्तियां: लोग 11 दिसंबर तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
- अंतिम प्रकाशन: 4 जनवरी 2027 को मतदाता सूची का अंतिम रूप से प्रकाशन किया जाएगा।
पार्टी प्रवक्ता टी.के.एस. इलांगोवन ने कहा कि आयोग का उद्देश्य केवल विपक्षी दलों को चुप कराना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी इस पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखेगी। इलांगोवन ने कहा कि यदि इस बार भी एसएसआर में किसी तरह की हेराफेरी पाई गई या प्रक्रिया में त्रुटियां मिलीं, तो डीएमके इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी।
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