हरियाणा
एक घंटा पहले
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इतिहास रचने वाली ट्रेन के पहले सारथी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा की धरती से देश की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया है। यह ट्रेन आधुनिक तकनीक का एक नायाब नमूना है जो न तो डीजल पर निर्भर है और न ही बिजली पर। इस ऐतिहासिक शुरुआत के साथ ही एक चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में है, और वह हैं राजेश कुमार। राजेश कुमार देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के लोको पायलट बने हैं, जिन्होंने इस ट्रेन को पटरी पर दौड़ाकर एक नया मुकाम हासिल किया है। फिलहाल यह ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अपनी सेवा देगी।
कौन हैं राजेश कुमार और उन्हें ही क्यों चुना गया?
लोको पायलट राजेश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, हालांकि उनका परिवार पिछले 65 साल से जींद में ही निवास कर रहा है। रेलवे के प्रति उनका लगाव विरासत में मिला है, क्योंकि उनके पिता भी रेलवे विभाग में कार्यरत थे। राजेश ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए रेलवे में सेवा देने का निर्णय लिया। उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए चुनने के पीछे सबसे बड़ा कारण जींद-गोहाना-सोनीपत रूट पर उनका व्यापक अनुभव है। इस मार्ग पर ट्रेन संचालन में वे सबसे अनुभवी चालक माने जाते हैं, जिसके चलते रेलवे प्रशासन ने इस नई तकनीक वाली ट्रेन की कमान उन्हें सौंपने का फैसला किया।
चेन्नई में मिली विशेष ट्रेनिंग
इस नई तकनीक को समझने के लिए रेलवे ने राजेश को चेन्नई भेजा, जहां उन्होंने 15 दिन की गहन ट्रेनिंग प्राप्त की। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने हाइड्रोजन तकनीक से चलने वाले इंजन की बारीकियों को सीखा। इतना ही नहीं, ट्रायल रन के दौरान भी ट्रेन को राजेश कुमार ने ही संचालित किया था। राजेश का कहना है कि यह इंजन सामान्य डीजल या इलेक्ट्रिक इंजन की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली है और इसका पिकअप भी बहुत शानदार है। उनके मुताबिक, सामान्य ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन को चलाना काफी सरल और सहज है।
प्रधानमंत्री से बातचीत ने बनाया दिन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात को लेकर राजेश काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि उनके जीवन में आज का दिन सबसे खास है। हालांकि वे रोजाना ट्रेन चलाते हैं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री के साथ सीधी बातचीत करना उनके लिए एक गर्व का क्षण रहा। राजेश ने बताया कि यह पल उनके लिए यादगार बन गया है और वे इसे जीवन भर संजोकर रखेंगे।
हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत और यात्रियों का अनुभव
यह अत्याधुनिक ट्रेन 10 कोच के साथ शुरू की गई है, जिसमें करीब 2,600 यात्री एक साथ सफर कर सकते हैं। ट्रेन में यात्रा करने वाले मुसाफिर काफी उत्साहित और खुश नजर आए। यात्रियों का मानना है कि यह सफर बेहद आरामदायक और आधुनिक सुविधाओं से लैस है। ट्रेन में सवार महिला यात्री रेणु ने सुझाव दिया कि इस ट्रेन का परिचालन दिल्ली तक बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इस सेवा को दिल्ली तक जोड़ा जाए, तो बड़ी संख्या में दैनिक यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिल सकेगा, क्योंकि वर्तमान में सोनीपत से आगे की यात्रा के लिए लोगों को अन्य साधनों पर निर्भर रहना पड़ता है। फिलहाल इस ट्रेन के रूट और समय सारणी को लेकर अभी भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।
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