अदाणी ग्रुप की 5 कंपनियों का सेबी के साथ समझौता, 1.51 करोड़ रुपये का भुगतान कर मामले का निपटारा व्यापार एक घंटा पहले 4
अदाणी समूह की पांच प्रमुख कंपनियों ने बाजार नियामक सेबी के साथ चल रही जांच को एक समझौते के जरिए समाप्त कर दिया है। यह मामला हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद उठे नियमों के उल्लंघन से संबंधित था, जिसके लिए कंपनियों ने कुल 1.51 करोड़ रुपये की राशि जमा की है।

बाजार नियामक के साथ सेटलमेंट

अदाणी समूह ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बाजार नियामक सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के साथ चल रही कानूनी कार्यवाही को सुलझा लिया है। समूह की पांच कंपनियों ने हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा जनवरी 2023 में लगाए गए कॉरपोरेट गवर्नेंस और नियमों के पालन से जुड़े आरोपों की जांच के संबंध में यह समझौता किया है। इन कंपनियों ने नियामक के पास सामूहिक रूप से 1.51 करोड़ रुपये की सेटलमेंट राशि जमा करवाई है।

सेबी के आधिकारिक सेटलमेंट आदेश के अनुसार, इस प्रक्रिया में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अदाणी टोटल गैस लिमिटेड, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड, अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड शामिल हैं। सेटलमेंट राशि के वितरण पर नजर डालें तो अदाणी एंटरप्राइजेज ने 76.05 लाख रुपये और अदाणी ग्रीन एनर्जी ने 45.50 लाख रुपये का भुगतान किया है। वहीं, अदाणी टोटल गैस, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस लिमिटेड और अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस में से प्रत्येक ने 9.75 लाख रुपये की राशि जमा की है।

लेनदेन के विवरण से जुड़ा मामला

सेबी की विस्तृत जांच में सामने आया था कि संबंधित पक्षों के बीच हुए लेनदेन यानी रिलेटेड पार्टी ट्रांजेक्शन की जानकारी का खुलासा करने और ऑडिट रिपोर्ट से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया गया था। नियामक के मुताबिक, अदाणी एंटरप्राइजेज ने वित्त वर्ष 2012-13 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट में अपनी सब्सिडियरी अदाणी एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और एक अन्य जुड़ी कंपनी वाकोडर इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के बीच हुए लेनदेन की जानकारी सार्वजनिक नहीं की थी। इसके साथ ही, कंपनी की ऑडिट और लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाली ऑडिट फर्म के पास उस समय वैध पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट का अभाव था।

नोटिस और कानूनी प्रक्रिया

सेबी ने फरवरी 2024 में इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था कि नियमों के कथित उल्लंघन के लिए उन पर जांच और दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए। कंपनियों ने इन आरोपों को बिना स्वीकार या अस्वीकार किए मामले को सुलझाने का विकल्प चुना। सेबी की उच्च अधिकार प्राप्त सलाहकार समिति ने जून 2026 में इस समझौते की शर्तों की सिफारिश की थी। अंततः 13 अगस्त को सेबी के पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल ने इस सेटलमेंट को मंजूरी दे दी।

हिंडनबर्ग रिपोर्ट का संदर्भ

जनवरी 2023 में आई हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट ने कॉरपोरेट गवर्नेंस और फंड रूटिंग को लेकर अदाणी समूह पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। हालांकि, सितंबर 2025 में सेबी ने गौतम अदाणी और उनके समूह के खिलाफ स्टॉक हेरफेर के आरोपों की जांच में पर्याप्त सबूत न मिलने पर उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। अब इस नवीनतम समझौते के बाद समूह से जुड़े नियमों के पालन से संबंधित लंबित मामले का निपटारा हो गया है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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