वेनेजुएला में भूकंप का तांडव: 1430 शव बरामद, 68 हजार से अधिक लोग अभी भी लापता विश्व 3 महीने पहले 140
वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के कारण हालात बेकाबू हो गए हैं, जहां अब तक 1430 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग मलबे में दबे हो सकते हैं। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमें और स्थानीय लोग अपनों की तलाश में दिन-रात एक कर रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी मदद के लिए आगे आया है।

वेनेजुएला में मची तबाही का खौफनाक मंजर

वेनेजुएला में आए दो लगातार शक्तिशाली भूकंपों ने देश की सूरत पूरी तरह बदल दी है। हर तरफ केवल मलबे का ढेर नजर आ रहा है और इन ढही हुई इमारतों के नीचे दबे लोगों की चीखें राहतकर्मियों को झकझोर रही हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1430 लोगों के शव मलबे से निकाले जा चुके हैं। हालांकि, चिंता की बात यह है कि आपदा के तीन दिन बाद भी 68,000 से अधिक लोग लापता हैं, जिससे मरने वालों की संख्या में भारी इजाफा होने की आशंका बनी हुई है।

भूकंप की भयावहता और उसका असर

इस आपदा की शुरुआत 7.2 तीव्रता के झटके के साथ हुई, लेकिन लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और महज 39 सेकंड बाद 7.5 तीव्रता का दूसरा और भी अधिक विनाशकारी भूकंप आया। इस दोहरे हमले ने वेनेजुएला के कई शहरों को खंडहर में बदल दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा से करीब 67.6 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है और कहा है कि प्रभावितों को इस समय सुरक्षित आश्रय, पीने का साफ पानी और तत्काल चिकित्सा सुविधाओं की सख्त जरूरत है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस तबाही से देश को लगभग 6.7 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मलबे के नीचे जिंदगी की तलाश

बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। राहत दलों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी फावड़े, भारी मशीनों और रस्सियों के जरिए अपने परिजनों को खोजने में जुटे हैं। कहीं-कहीं तो लोग अपने नंगे हाथों से ही मलबा हटाते नजर आ रहे हैं। इस दुखद दौर में काराबालेडा शहर से एक सुखद खबर भी सामने आई, जहां भूकंप के तीन दिन बाद 11 साल के एक बच्चे को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन हजारों लोगों में एक नई उम्मीद की किरण जगा दी है जो अभी भी अपनों की सलामती की दुआ कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मदद और सरकार पर उठे सवाल

वेनेजुएला की अंतरिम नेता डेल्सी रोड्रिगेज ने जानकारी दी है कि दुनिया भर के 24 देशों ने संकट की इस घड़ी में मदद का हाथ बढ़ाया है। कई देशों ने राहत सामग्री के साथ-साथ खोजी कुत्तों और हजारों प्रशिक्षित राहतकर्मियों को वेनेजुएला भेजा है ताकि मलबे में दबे लोगों को तेजी से खोजा जा सके।

दूसरी ओर, सरकार की कार्यशैली पर सवालिया निशान भी उठ रहे हैं। कई स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों का आरोप है कि सरकारी राहत और बचाव कार्य काफी धीमा है और सही तरीके से व्यवस्थित नहीं है। कुछ स्वयंसेवकों ने यह शिकायत भी की है कि आपदाग्रस्त इलाकों तक पहुंचने के लिए उन्हें सरकारी अनुमति पाने में लंबा इंतजार करना पड़ा, जिसके कारण कीमती समय बर्बाद हुआ। राहत कार्यों में देरी और अव्यवस्था के कारण प्रभावितों के बीच सरकार के प्रति नाराजगी भी देखने को मिल रही है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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