फ्लाईदुबई का को-पायलट हम्माम अल-हमामी: न्यूजीलैंड में बिताए 175 दिनों की अब होगी गहन जांच विश्व 3 घंटे पहले 8
फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान को-पायलट हम्माम अल-हमामी द्वारा कैप्टन पर हमला करने की घटना के बाद अब उसकी पृष्ठभूमि की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियां विशेष रूप से साल 2018-19 में उसके न्यूजीलैंड प्रवास को लेकर सुराग जुटा रही हैं।

न्यूजीलैंड कनेक्शन की पड़ताल

फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या FZ1073 के दौरान को-पायलट हम्माम अल-हमामी द्वारा अपने ही कैप्टन स्मित मच्छर पर किए गए जानलेवा हमले की घटना ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस चौंकाने वाली हरकत के बाद, सुरक्षा एजेंसियां और जांचकर्ता अब इस ओमानी नागरिक के पिछले रिकॉर्ड को खंगालने में जुटे हैं। इस मामले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब जांच में हम्माम अल-हमामी के न्यूजीलैंड से जुड़े पुराने रिकॉर्ड सामने आए। पता चला है कि यह आरोपी साल 2018-19 के दौरान लंबे समय तक न्यूजीलैंड में रहा था। अब सुरक्षा एजेंसियां इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर उस दौरान वह वहां किस तरह की गतिविधियों में शामिल था।

175 दिनों का रहस्यमय प्रवास

न्यूजीलैंड पुलिस के सहायक आयुक्त माइकल जॉनसन ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि हम्माम अल-हमामी 175 दिनों तक न्यूजीलैंड में मौजूद था। आव्रजन विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक, वह 30 नवंबर 2018 को न्यूजीलैंड पहुंचा था और करीब छह महीने वहां रहने के बाद 23 मई 2019 को देश छोड़कर वापस चला गया। वह वहां एक स्टूडेंट वीजा पर गया था। हालांकि इतने लंबे समय तक वहां रुकने के पीछे का मकसद अब पूरी तरह से संदिग्ध नजर आ रहा है, जिसके चलते पुलिस उसके उस पूरे कार्यकाल का डेटा फिर से जांच रही है।

फ्लाइट ट्रेनिंग और अनसुलझे सवाल

शुरुआती छानबीन में यह बात सामने आई है कि अल-हमामी न्यूजीलैंड में एक यूके-आधारित कंपनी के साथ अपनी फ्लाइट ट्रेनिंग का एक हिस्सा पूरा करने के लिए गया था। राहत की बात यह है कि वह संबंधित कंपनी अब न्यूजीलैंड में अपना कोई भी कामकाज नहीं कर रही है। पुलिस का कहना है कि आधिकारिक तौर पर वह वहां उड़ान प्रशिक्षण से जुड़े कामों के लिए ही रुका था। लेकिन, जिस प्रकार से उसने उड़ान के दौरान 170 से अधिक यात्रियों की जान जोखिम में डालकर कैप्टन को खून से लथपथ कर दिया, उसने उसके हर एक पुराने कदम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि क्या उस प्रशिक्षण अवधि के दौरान उसका व्यवहार सामान्य था या उसने किसी तरह की हिंसक प्रवृत्ति विकसित कर ली थी।

सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

यह मामला महज एक पायलट की निजी हरकत नहीं रह गया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्री सुरक्षा और पायलटों की बैकग्राउंड जांच (सत्यापन प्रक्रिया) पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा गया है। किसी भी विमान के कॉकपिट में घुसकर अपने ही साथी को लहूलुहान कर देना किसी सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है। पुलिस अब उन 175 दिनों के हर पल की गतिविधि का पता लगाने में जुटी है ताकि इस खतरनाक मानसिकता के पीछे की जड़ को समझा जा सके। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या वह उस दौरान किसी अन्य संदिग्ध गतिविधि में शामिल था या उसका एकमात्र लक्ष्य केवल विमान उड़ाने का कौशल हासिल करना ही था। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और पुराने रिकॉर्ड्स को खंगाला जाएगा, कई नए तथ्यों के सामने आने की पूरी उम्मीद है जो इस मामले की भयावहता को स्पष्ट करेंगे। फिलहाल, न्यूजीलैंड पुलिस के रिकॉर्ड की समीक्षा जारी है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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