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14 घंटे पहले
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विचारों
क्रिप्टोकरेंसी के प्रति भारतीय रिजर्व बैंक का नजरिया
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्रिप्टोकरेंसी के भविष्य और इसके उपयोग को लेकर एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया है। शनिवार को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत क्रिप्टो संपत्तियों को लेकर बेहद सतर्क है। हालांकि, रिजर्व बैंक इससे जुड़ी बुनियादी तकनीकों जैसे कि डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी और टोकन सिस्टम के इनोवेशन का समर्थन करता है और इन्हें बढ़ावा देने के पक्ष में है। गवर्नर का मानना है कि इन तकनीकों का लाभ केंद्रीय बैंक के भीतर और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से बाहरी क्षेत्रों में लिया जा सकता है।
तकनीकी समझ और उपयोग
गवर्नर ने विस्तार से बताया कि डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी एक ऐसा सिस्टम है जिसमें लेनदेन का डेटा किसी एक केंद्रीय सर्वर के बजाय नेटवर्क के कई कंप्यूटरों पर साझा किया जाता है। वहीं, टोकन सिस्टम वह प्रक्रिया है जिसके तहत वास्तविक संपत्ति के स्वामित्व या संवेदनशील जानकारियों, जैसे कि क्रेडिट और डेबिट कार्ड के नंबर, को सुरक्षित डिजिटल कोड यानी टोकन में परिवर्तित कर दिया जाता है। बैंक का जोर इन तकनीकों के विकास पर है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सावधानी बरती जा रही है।
मौद्रिक संप्रभुता और भुगतान की स्थिति
क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा करते हुए संजय मल्होत्रा ने कहा कि इससे मौद्रिक संप्रभुता और मौद्रिक नीति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से उन उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का उल्लेख किया जहां पूंजी प्रवाह पर नियंत्रण है। गवर्नर ने तर्क दिया कि जिस उद्देश्य के लिए क्रिप्टोकरेंसी का समर्थन किया जाता है, वह समस्या घरेलू स्तर पर पहले ही हल हो चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज भारत और दुनिया के कई अन्य देशों में घरेलू भुगतान की प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक तेज, सस्ती और सुविधाजनक बन चुकी है।
सीमा पार भुगतान की चुनौतियां और AI का प्रभाव
गवर्नर ने माना कि असली चुनौती घरेलू लेनदेन में नहीं बल्कि सीमा पार होने वाले भुगतान यानी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट में है। इस समस्या को दूर करने के लिए रिजर्व बैंक CBDC जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर बढ़ते सार्वजनिक कर्ज और बॉन्ड यील्ड के सवाल पर उन्होंने कहा कि बॉन्ड यील्ड का उतार-चढ़ाव मांग और आपूर्ति के सिद्धांत पर चलता है। संजय मल्होत्रा ने बताया कि वर्तमान में सरकार और निजी क्षेत्र, दोनों का खर्च तेजी से बढ़ा है, जिसमें AI जैसे नए क्षेत्रों में किया जा रहा निवेश भी शामिल है। सीमित पूंजी और बढ़ते खर्च के कारण बॉन्ड यील्ड और कर्ज में वृद्धि हो रही है।
मौद्रिक नीति का प्राथमिक लक्ष्य
अंत में, गवर्नर ने साफ किया कि भारत की मौद्रिक नीति पूरी तरह से घरेलू आर्थिक विकास और महंगाई की स्थिति पर केंद्रित है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दुनिया भर में बदलती ब्याज दरें भारत को भी प्रभावित करती हैं, जिसका असर देश की वास्तविक ब्याज दरों पर पड़ता है। इन बाहरी प्रभावों पर पैनी नजर रखना केंद्रीय बैंक की जिम्मेदारी है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था सुरक्षित और स्थिर बनी रहे।
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