झारखंड
2 घंटे पहले
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ओडिशा के नए राज्यपाल के रूप में ब्रज मोहन राम की नियुक्ति
झारखंड की राजनीति के अनुभवी चेहरे और पलामू लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके ब्रज मोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल बनाया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को देश के छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और उनके तबादले से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणा की। ब्रज मोहन राम, जो लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठनात्मक ढांचे और चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं, अब एक नए संवैधानिक दायित्व के साथ अपनी पारी की शुरुआत करेंगे। वे ओडिशा के निवर्तमान राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति का स्थान लेंगे, जिन्होंने जनवरी 2025 में अपना पदभार ग्रहण किया था।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
ब्रज मोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को हुआ था। उनका जन्मस्थान तत्कालीन बिहार राज्य के पलामू जिले का चंदवा गांव था, जो वर्तमान में झारखंड के लातेहार जिले का हिस्सा है। उनके पिता का नाम अर्जुन राम बैठा और माता का नाम चैती देवी है। एक सामान्य ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े ब्रज मोहन राम ने अपनी शिक्षा लोहरदगा के बीएस कॉलेज से पूर्ण की, जहां से उन्होंने स्नातक (बीए) की डिग्री हासिल की। उनका पारिवारिक जीवन 5 मार्च 1979 को लीला देवी के साथ विवाह के साथ आगे बढ़ा। उनके तीन बेटे हैं। राजनीति के गलियारों में आने से पूर्व उनका जीवन कृषि कार्यों और स्थानीय ग्रामीण समाज की सेवा से गहराई से जुड़ा हुआ था, जिसने उन्हें जमीनी स्तर की समस्याओं को करीब से समझने में मदद की।
बिहार विधानसभा से लोकसभा तक का सफर
ब्रज मोहन राम की राजनीतिक यात्रा अविभाजित बिहार के समय से शुरू हुई थी। वर्ष 1991 से 1995 तक वे बिहार विधानसभा के सदस्य रहे और लातेहार विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व किया। उस दौर में झारखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में नहीं आया था, इसलिए उनकी राजनीतिक पहचान उस समय के बिहार की सक्रिय राजनीति में बनी। विधानसभा में अपने कार्यकाल को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया। वे पलामू संसदीय क्षेत्र से लगातार तीन बार जनता का प्रतिनिधित्व करने में सफल रहे। वर्ष 1996 में उन्होंने 11वीं लोकसभा का चुनाव जीता, जिसके बाद 1998 में 12वीं लोकसभा और 1999 में 13वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में उन्होंने दिल्ली में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह वह दौर था जब झारखंड को एक अलग राज्य बनाने की मांग जोर पकड़ रही थी और क्षेत्र की अस्मिता का मुद्दा प्रमुखता से छाया हुआ था।
संगठनात्मक सक्रियता और नई भूमिका
संसदीय राजनीति के अलावा ब्रज मोहन राम ने भाजपा संगठन के भीतर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आंकड़ों के अनुसार, 1996 से 1998 के दौरान उन्होंने रांची में वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष के तौर पर दायित्वों का निर्वहन किया। इस जिम्मेदारी ने उन्हें अनुसूचित जाति समुदाय के हितों की रक्षा और उनके उत्थान से जुड़ी चुनौतियों को समझने का अवसर दिया। अपनी लंबी राजनीतिक सेवा के बाद अब उन्हें ओडिशा के राज्यपाल का पद सौंपा गया है, जो एक गरिमामयी संवैधानिक पद है। इस भूमिका में वे संविधान के दायरे में रहकर ओडिशा राज्य के प्रशासन और संवैधानिक व्यवस्थाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके समर्थकों और झारखंड के राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को उनके लंबे सार्वजनिक जीवन की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
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