माता हासी देवी: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जारी किया 200 रुपए का विशेष स्मारक सिक्का, जानें कौन थीं सिंधी समाज की यह महान संत छत्तीसगढ़ एक दिन पहले 13
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान सिंधी समाज की प्रमुख संत माता हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में 200 रुपए का स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया है।

राष्ट्रपति द्वारा विशेष सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस समय छत्तीसगढ़ के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने रायपुर के लोकभवन स्थित छत्तीसगढ़ मंडपम में एक गरिमामयी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने सिंधी समाज की प्रख्यात संत माता हासी देवी के सम्मान में 200 रुपए का एक स्मारक सिक्का और एक विशेष डाक टिकट का अनावरण किया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी उपस्थित रहे।

सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक गौरव

भारत सरकार द्वारा जारी किया गया यह स्मारक सिक्का सिंधी समुदाय के लिए एक बेहद गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है। माता हासी देवी की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में इसे जारी किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह स्मारक सिक्का न केवल माता हासी देवी के प्रति सम्मान प्रकट करता है, बल्कि उनके आध्यात्मिक योगदान और उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक माध्यम भी है। सिक्के के एक तरफ माता हासी देवी की आकृति अंकित है, जबकि दूसरी तरफ अशोक स्तंभ का सिंह चिन्ह और 200 रुपए का मूल्य प्रदर्शित है। देश और विदेश में रहने वाले लाखों सिंधी श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक जल्द ही शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इस सिक्के को प्राप्त कर सकेंगे।

माता हासी देवी का जीवन और योगदान

माता हासी देवी सिंधी समाज की एक अत्यंत सम्मानित और प्रेरणादायक विभूति रही हैं। उनका जन्म वर्ष 1826 में सिंध प्रांत में हुआ था। वह रायपुर के प्रसिद्ध शदाणी दरबार की पंचम पीठाधीश्वर थीं। उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा आध्यात्मिकता, जनसेवा और समाज सुधार को समर्पित रहा। बताया जाता है कि वे केवल 26 वर्ष की आयु में शदाणी दरबार की पहली महिला पीठाधीश्वर के रूप में चुनी गई थीं। उन्होंने करीब 57 वर्ष तक शदाणी दरबार के पीठाधीश्वर के पद पर रहते हुए समाज की सेवा की।

अपनी सेवा यात्रा के दौरान उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान दिया। उन्होंने हिंदी और संस्कृत भाषा के साथ-साथ संगीत की शिक्षा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका 'अन्न भंडार' गरीबों और जरूरतमंदों के लिए हमेशा खुला रहता था, जिसके जरिए उन्होंने अनगिनत लोगों को राहत पहुंचाई। 30 अप्रैल 1909 को उन्होंने अपनी देह का त्याग किया था, लेकिन उनके विचार आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हैं।

राष्ट्रपति का छत्तीसगढ़ दौरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह छत्तीसगढ़ दौरा काफी व्यस्त है। स्मारक सिक्का जारी करने के कार्यक्रम के अलावा, वह रायपुर के इंडोर स्टेडियम में नुआखाई त्योहार के मौके पर आयोजित 'सेवा सम्मान पर्व' और 'युवा प्रबोधन' जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी शिरकत करेंगी। इसके अलावा, राष्ट्रपति के कार्यक्रम में बस्तर जिले के ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शामिल होना और बस्तर दशहरा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना भी शामिल है। यह पूरा दौरा राज्य के सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों को नई पहचान देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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