राहुल गांधी और विजय थलापति आए साथ, चेन्नई में होगा बड़ा सियासी संग्राम राष्ट्रीय राजनीति 5 घंटे पहले 7
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हाथ मिला लिया है, जिससे राज्य में विपक्षी एकता को नई मजबूती मिली है।

चेन्नई में विरोध की तैयारी

तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलापति ने हाथ मिला लिया है। अब इसका सीधा असर गुरुवार को चेन्नई की सड़कों पर देखने को मिलेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर तमिलनाडु में टीवीके और कांग्रेस पार्टी एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करने जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जो खेल अब तक दिल्ली की सत्ता के गलियारों में देखा जा रहा था, उसकी झलक अब तमिलनाडु में भी दिखाई देगी।

लोकतंत्र बचाओ अभियान

विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पिछले कई दिनों से राहुल गांधी और अन्य विपक्षी पार्टियां एसआईआर (SIR) में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठा रही हैं और इसी कड़ी में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही हैं। अब चेन्नई में टीवीके (तमिलगा वेट्ट्री कषगम) भी इस विरोध में पूरी ताकत के साथ शामिल हो रही है। इस प्रदर्शन को 'डेमोक्रेसी बचाओ' अभियान का नाम दिया गया है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अनुसार, इस पूरे प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेता बी मणिक्कम टैगोर करेंगे। टीवीके के आने से विपक्षी खेमे को तमिलनाडु में जबरदस्त राजनीतिक मजबूती मिली है। राज्य में विपक्षी गठबंधन की सभी सात पार्टियां इस प्रदर्शन में अपने प्रतिनिधि भेजेगी।

टीवीके का पहला बड़ा कदम

यह पहला मौका है जब विजय थलापति की पार्टी टीवीके किसी ऐसे प्रदर्शन का हिस्सा बन रही है जिसमें सीधे तौर पर चुनाव आयोग के मुखिया को हटाने की मांग की जा रही है। 3 अक्टूबर को जब से टीवीके ने इंडिया ब्लॉक का दामन थामा है, तब से ही पार्टी की सक्रियता बढ़ गई है। गुरुवार के इस प्रदर्शन में कई बड़े राजनीतिक चेहरे नजर आएंगे। इनमें स्कूल शिक्षा मंत्री ए राजमोहन, विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची (VCK) के अध्यक्ष और सांसद थोल थिरुमावलवन, मरुमलार्ची द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (MDMK) के महासचिव वैको और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रमुख केएम कादर मोहिद्दीन प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा सीपीआई (एम) के राज्य सचिव पी. शनमुगम, सीपीआई के राज्य सचिव एम वीरपांडियन, सीपीआई (एमएल) के राज्य सचिव पाला असैदम्बी और तमिलनाडु के लिए एआईसीसी इंचार्ज निवेदिता अल्वा भी इस विरोध मार्च में भाग लेंगे।

विपक्षी एकता और ऐतिहासिक बदलाव

टीवीके का इंडिया ब्लॉक में शामिल होना विपक्षी एकता के लिहाज से एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। कांग्रेस नेता मणिक्कम टैगोर ने इसे बहुत बड़ा राजनीतिक बदलाव बताया है। चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के खिलाफ यह विरोध प्रदर्शन पहले से ही घोषित था, और अब टीवीके के समर्थन के बाद इसकी गूंज और तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल एक विरोध नहीं, बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर विपक्षी दलों की ताकत दिखाने का एक माध्यम है।

विवाद और आरोप-प्रत्यारोप

एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग को जवाबदेही तय करनी होगी। इससे पहले जब टीवीके इस मुद्दे पर चुप थी, तो द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (DMK) ने उन पर निशाना साधा था। 2 अक्टूबर को डीएमके अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने विजय थलापति पर सार्वजनिक रूप से सवाल खड़े किए थे। स्टालिन ने आरोप लगाया था कि विजय भाजपा की आलोचना करने से डर रहे हैं और इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में पूछा था कि आखिर मुख्यमंत्री जी को किस बात का डर है। डीएमके ने राज्य पुलिस पर भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग का आरोप लगाया था।

बदलते समीकरण

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस और डीएमके के रिश्तों में भी तल्खी देखी गई। 12 अक्टूबर को डीएमके ने इंडिया ब्लॉक से बाहर निकलने की घोषणा कर दी और कांग्रेस पर गठबंधन के भीतर विश्वासघात करने का आरोप लगाया। डीएमके ने कांग्रेस को 'दूसरी पार्टी की स्लीपर सेल' तक कह दिया था। हालांकि, 10 अक्टूबर के बाद से हालात तेजी से बदले। राहुल गांधी और विजय थलापति की मुलाकात ने समीकरणों को बदल दिया। पलावक्कम में कॉफी पर हुई इस बैठक के बाद विजय ने प्रदर्शन में शामिल होने का फैसला किया, जिससे राहुल गांधी की दक्षिण भारत में पकड़ और मजबूत होती दिखाई दे रही है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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