₹46 हजार का यह खास कृषि यंत्र बना किसानों के लिए वरदान, जहां ट्रैक्टर नहीं पहुंच पाता वहां करता है कमाल बिहार एक घंटा पहले 2
खेती की बढ़ती लागत और मजदूरों की किल्लत से परेशान किसानों के लिए पावर वीडर एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है, जो कम खर्च में निराई-गुड़ाई का काम आसान बनाता है।

खेती में आधुनिक तकनीक की बड़ी भूमिका

आज के दौर में कृषि क्षेत्र में लगातार बदलाव आ रहे हैं। गया सहित राज्य के अन्य जिलों में किसान धान, गेहूं, मक्का, दलहन, तिलहन और विभिन्न सब्जियों की बंपर पैदावार लेने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं। फसलों की अच्छी पैदावार हासिल करने के लिए खेत की समय पर जुताई, खरपतवार को हटाना और मिट्टी की गुड़ाई जैसे कार्य अत्यंत अनिवार्य हैं। हालांकि, इन दिनों किसानों के सामने मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी का संकट एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करना अब एक आवश्यकता बन गया है। इन्ही में से एक बेहद प्रभावी यंत्र है पावर वीडर।

पावर वीडर की कार्यप्रणाली और विशेषता

पावर वीडर एक ऐसा यांत्रिक उपकरण है जो इंजन या मोटर के माध्यम से संचालित होता है। इस यंत्र में विशेष ब्लेड लगे होते हैं जो खेत की ऊपरी मिट्टी की परत को काटने के साथ ही गुड़ाई का काम बखूबी करते हैं। यह खरपतवार नियंत्रण के लिए बहुत असरदार माना जाता है। बाजार में उपलब्ध अधिकांश छोटे पावर वीडर पेट्रोल या डीजल इंजन की मदद से काम करते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका आकार है, जो ट्रैक्टर की तुलना में काफी छोटा होता है। यही कारण है कि यह छोटे खेतों, बागों और सब्जियों की कतारों के बीच बहुत आसानी से काम कर सकता है, जहां बड़े ट्रैक्टरों को ले जाना मुमकिन नहीं होता।

किसान जीवेश यादव ने अपनाया आधुनिक समाधान

गया जिले के नवादा गांव के निवासी किसान जीवेश यादव, जो लगभग 1 एकड़ भूमि पर खेती करते हैं, ने इस तकनीक को अपनाया है। उन्होंने 46 हजार रुपये की लागत से यह पावर वीडर खरीदा है। जीवेश बताते हैं कि वे इस मशीन का उपयोग पूरे साल सब्जी की खेती के साथ-साथ मौसमी गेहूं की फसल के दौरान भी करते हैं। उनका अनुभव है कि बिहार के बहुत से किसानों के पास खेती योग्य भूमि का आकार सीमित है। ऐसे में छोटे खेतों में बड़े ट्रैक्टर से काम करवाना हमेशा सुविधाजनक या किफायती नहीं होता। पावर वीडर उन स्थितियों में सबसे बेहतर विकल्प है, जहां मिट्टी को भुरभुरा बनाने, खरपतवार निकालने और फसलों के बीच गुड़ाई करने की जरूरत होती है।

कमाई का अतिरिक्त जरिया

यह मशीन छोटे और मध्यम वर्गीय किसानों के लिए बेहद फायदेमंद है। जो किसान साल में कई बार सब्जियां या मक्का जैसी फसलों की खेती करते हैं, उन्हें साल भर में बार-बार निराई-गुड़ाई की आवश्यकता पड़ती है। यदि पावर वीडर की सहायता से यह काम समयबद्ध तरीके और कम खर्च में हो जाए, तो किसान की कुल उत्पादन लागत में काफी कमी आती है। इतना ही नहीं, यह मशीन कमाई का एक अतिरिक्त स्रोत भी बन सकती है। किसान अपने काम के साथ-साथ दूसरे जरूरतमंद किसानों के खेतों में भी इस मशीन को किराये पर चलाकर अपनी आय में इजाफा कर सकते हैं। यह तकनीक न केवल खेती को आसान बना रही है, बल्कि आर्थिक रूप से भी किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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