विश्व
एक घंटा पहले
3
विचारों
पेशावर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार को एक बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को पेशावर हाईकोर्ट ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी समेत पीटीआई के 28 नेताओं की गिरफ्तारी पर लगी रोक को हटाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इन नेताओं की अंतरिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए अब मामले को डिवीजन बेंच के पास भेजा जाएगा। पेशावर हाईकोर्ट अब इस पूरे मामले पर 20 अक्टूबर को सुनवाई करेगा।
इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहा पीटीआई का मार्च
यह कानूनी फैसला शहबाज शरीफ सरकार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है, क्योंकि इस समय पूरा पाकिस्तान इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। तहरीक-ए-इंसाफ द्वारा निकाला जा रहा लॉन्ग मार्च इस्लामाबाद की सीमाओं के बेहद करीब पहुंच गया है। लाखों की संख्या में समर्थक सड़कों पर उतरकर इमरान खान की रिहाई के नारे लगा रहे हैं। सरकार ने इस मार्च को रोकने के लिए इस्लामाबाद की सीमाओं पर जगह-जगह भारी कंटेनर खड़े कर दिए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
सड़कों पर जारी रहेगी कानूनी लड़ाई
इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी कर रहे हैं। शहबाज शरीफ की सरकार हर हाल में इस मार्च को कुचलना चाहती है, जिसके तहत पीटीआई के नेताओं को चुन-चुनकर गिरफ्तार करने की योजना बनाई गई थी। सुहैल अफरीदी को भी एक पुराने मामले में गिरफ्तार करने की पूरी तैयारी थी, लेकिन पेशावर हाईकोर्ट ने सरकार की इस योजना पर पानी फेर दिया। इस राहत के बाद मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि इमरान खान की रिहाई होकर रहेगी और अब वे अपनी कानूनी लड़ाई को अदालत के साथ-साथ सड़कों पर भी पूरी ताकत से लड़ेंगे।
जनता में सरकार और फौज के खिलाफ भारी आक्रोश
पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति को देखें तो यह स्पष्ट है कि वहां की जनता में फौज और शहबाज शरीफ की सरकार के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है। आम जनता इमरान खान के साथ मजबूती से खड़ी है, लेकिन हुकूमत और सेना अब भी इस सच्चाई को स्वीकार करने से बच रहे हैं। उन्हें लगता है कि पुलिस और बल का इस्तेमाल करके जनभावनाओं को दबाया जा सकता है। हालांकि, पाकिस्तान की कई अदालतें लगातार इमरान खान और उनके समर्थकों के पक्ष में निर्णय सुना रही हैं, लेकिन इसके बावजूद शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर जमीनी हकीकत को अनदेखा कर रहे हैं।
Comments
0 comment