तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर शत्रुघ्न सिन्हा का बड़ा हमला, बोले- तत्काल रिहा करो और केस वापस लो बिहार एक घंटा पहले 2
बिहार में छात्र आंदोलन और तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी पर शत्रुघ्न सिन्हा ने सरकार को घेरा है। उन्होंने दिल्ली समझौते का हवाला देते हुए राज्य में दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेने और तेज प्रताप को तुरंत रिहा करने की मांग की है।

बिहार की राजनीति में उबाल

बिहार में हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई सख्त कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद छेड़ दिया है। जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। इस मामले पर अब कांग्रेस के दिग्गज नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक कार्रवाई और सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा की दो टूक मांग

शत्रुघ्न सिन्हा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि तेज प्रताप यादव को बिना देरी किए जेल से रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि जिस तरह से दिल्ली में पूर्व में एक समझौता हुआ था, उसी तर्ज पर बिहार में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी मुकदमों को तुरंत प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए। सिन्हा ने अपने बयान में राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेज प्रताप यादव को एक योग्य राजनीतिक कार्यकर्ता बताते हुए उनकी गिरफ्तारी को गलत ठहराया है। उनका मानना है कि जितनी जल्दी इस मामले में सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे, उतना ही प्रदेश के हित में होगा।

प्रशासनिक बर्बरता और असंतोष का मुद्दा

शत्रुघ्न सिन्हा ने सिर्फ तेज प्रताप यादव की रिहाई की बात ही नहीं की, बल्कि उन्होंने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में छात्रों के बीच फैले असंतोष और हिंसा पर भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सीवान, पटना और छपरा जैसे जिलों में जिस तरह से छात्रों के साथ प्रशासन ने व्यवहार किया और कथित बर्बरता दिखाई, वह बेहद निंदनीय है। सिन्हा ने साफ लहजे में कहा कि प्रशासन की यह कार्यशैली किसी भी लोकतांत्रिक ढांचे में स्वीकार्य नहीं है।

क्या राजनीतिक बदले की है कार्रवाई?

अपने पोस्ट के जरिए शत्रुघ्न सिन्हा ने सरकार पर राजनीतिक द्वेष का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कई बड़े सवाल खड़े किए हैं कि आखिर इस गिरफ्तारी के पीछे असली मंशा क्या है। उन्होंने पूछा कि क्या यह किसी बदले की भावना से की गई कार्रवाई है? सिन्हा ने आशंका जताई कि क्या तेज प्रताप यादव द्वारा प्रशांत किशोर को अपना समर्थन देने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया है। उन्होंने आगे कहा कि क्या यह सत्ता पक्ष में बांकीपुर सीट को लेकर हारने के डर से प्रेरित है या फिर वे प्रशांत किशोर की बढ़ती लोकप्रियता और उनकी जीत की संभावनाओं से घबरा गए हैं।

पुलिस और कानून का अपना पक्ष

एक तरफ जहां विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा है, वहीं पुलिस और प्रशासन ने अपने स्तर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तेज प्रताप यादव पर दर्ज एफआईआर में उन पर दंगा भड़काने, पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं। पुलिस का कहना है कि उन्होंने ड्यूटी पर तैनात थाना प्रभारी को भी घायल किया है और सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न की है। अदालत ने इन गंभीर धाराओं के तहत उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है, जिससे यह स्पष्ट है कि यह मामला अब केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहकर कानूनी जटिलताओं में भी फंस चुका है।

राज्यभर में गिरफ्तारियों का आंकड़ा

बिहार बंद के दौरान हुए प्रदर्शनों के बाद पुलिस की सख्ती लगातार जारी है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के विभिन्न हिस्सों में अब तक लगभग 350 प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों का यह कहना है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और कानून-व्यवस्था को बहाल करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

सियासी घमासान तेज

तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद से ही राज्य में विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ अपने हमले तेज कर दिए हैं। तेज प्रताप के छोटे भाई तेजस्वी यादव पहले ही इस आंदोलन को लेकर सरकार को चेतावनी दे चुके हैं। अब शत्रुघ्न सिन्हा के इस कड़े रुख ने इस पूरे मामले को एक बड़ा राजनीतिक मोड़ दे दिया है। 27 जुलाई को सामने आए उनके इस बयान ने यह साबित कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। देखना यह है कि क्या प्रशासन अपने इस कदम पर पुनर्विचार करेगा या फिर कानूनी प्रक्रिया के तहत यह संघर्ष और लंबा खिंचेगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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