बिहार
2 घंटे पहले
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विचारों
गठबंधन की गांठ खुली, आमने-सामने आए पुराने साथी
बिहार की राजनीति में विधान परिषद के आगामी चुनाव ने बड़े सियासी फेरबदल और अंतर्कलह को उजागर कर दिया है। सत्ता की साझेदारी का दावा करने वाले महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर उपजा विवाद अब सार्वजनिक हो चुका है। स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि 8 सीटों पर होने वाले चुनाव में से 6 सीटों पर महागठबंधन के घटक दल, जिनमें मुख्य रूप से आरजेडी, कांग्रेस और वाम दल शामिल हैं, आपस में ही भिड़ रहे हैं। यह स्थिति केवल महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल नहीं उठा रही है, बल्कि यह भी दिखा रही है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं किस तरह पुराने गठबंधनों को कमजोर कर रही हैं।
दरभंगा शिक्षक सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला
सबसे चौंकाने वाली तस्वीर दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सामने आ रही है। यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वर्तमान एमएलसी मदन मोहन झा अपनी उम्मीदवारी को बरकरार रखे हुए हैं, लेकिन उन्हें चुनौती देने के लिए गठबंधन के ही साथी मैदान में कूद पड़े हैं। आरजेडी ने यहां कुंवर राय को टिकट देकर कांग्रेस की राह मुश्किल कर दी है। मामला यहीं नहीं थमा, बल्कि सीपीआई ने भी रामदेव राय को चुनावी समर में उतारकर इस मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय बना दिया है। इस तरह एक ही खेमे के तीन दल आपस में ही वर्चस्व की लड़ाई लड़ते दिख रहे हैं।
किन-किन सीटों पर हो रही है आपसी रार
महागठबंधन के भीतर सीटों को लेकर छिड़ी यह जंग केवल दरभंगा तक ही सीमित नहीं है। राज्य की अन्य महत्वपूर्ण सीटों पर भी सहयोगी दलों के उम्मीदवार एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इसके कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:
- पटना स्नातक सीट: यहां आरजेडी के दिलीप कुमार और कांग्रेस के डॉ. असदुल्लाह खान आमने-सामने हैं।
- दरभंगा स्नातक सीट: आरजेडी के अनिल कुमार झा के खिलाफ कांग्रेस के रजनीकांत पाठक चुनावी मैदान में हैं।
- कोसी स्नातक सीट: आरजेडी के नितेश कुमार और कांग्रेस के मनोज कुमार जायसवाल के बीच सीधा संघर्ष है।
- पटना शिक्षक सीट: आरजेडी के डॉ. संजीव कुमार सिंह का मुकाबला कांग्रेस के संजय यादव से है।
- सारण शिक्षक सीट: आरजेडी के प्रो. जयराम यादव और सीपीआई के विद्यासागर विद्यार्थी एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं।
कुल मिलाकर, आरजेडी ने 7 सीटों पर, कांग्रेस ने 5 सीटों पर, सीपीआई ने 2 सीटों पर और सीपीएम ने 1 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि तालमेल के अभाव में गठबंधन के भीतर का असंतोष कितना गहरा है।
जेडीयू में भी बगावत के सुर
महागठबंधन की मुश्किलों के बीच एनडीए के खेमे यानी जेडीयू के भीतर भी सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। पटना स्नातक सीट पर जेडीयू ने अपने मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को मैदान में उतारा है, लेकिन पार्टी के ही विधायक अनंत सिंह ने बगावती तेवर दिखाते हुए जन सुराज के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का समर्थन कर दिया है। अनंत सिंह के इस कदम ने पार्टी की रणनीति को मुश्किल में डाल दिया है।
इस पूरे मामले को संभालने के लिए जेडीयू का शीर्ष नेतृत्व सक्रिय हो गया है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के साथ मिलकर पूरे घटनाक्रम पर चर्चा की है। अनंत सिंह को मनाने और डैमेज कंट्रोल करने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं, लेकिन पटना स्नातक सीट का यह मुकाबला अब जेडीयू के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
23 अक्टूबर को होगी गठबंधन की परीक्षा
राज्य की इन 8 सीटों, जिनमें 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं, पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है। यह चुनाव केवल विधान परिषद की सीटों के लिए नहीं, बल्कि उन राजनीतिक गठबंधनों के लिए एक बड़ी परीक्षा है जो एक ओर साथ चलने का दावा करते हैं, लेकिन चुनावी रण में एक-दूसरे को ही पछाड़ने में लगे हैं। यदि गठबंधन की यह दरार नहीं भरी गई, तो इसके परिणाम भविष्य की राजनीति पर गहरा असर डाल सकते हैं। अब देखना यह होगा कि मतदान के दिन तक क्या स्थिति बदलती है या फिर महागठबंधन के नेता इसी तरह एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी प्रचार जारी रखते हैं।
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