फतह-4 मिसाइल के टेस्ट पर पाकिस्तान का झूठा शोर, भारत का S-400 करेगा पल भर में ढेर विश्व 11 घंटे पहले 2
ऑपरेशन सिंदूर में करारी हार झेलने के बाद पाकिस्तान अब फतह-4 मिसाइल का परीक्षण कर खुद को ताकतवर दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यह मिसाइल भारत के S-400 डिफेंस सिस्टम के सामने टिक नहीं पाएगी।

पाकिस्तान का नया प्रोपेगेंडा

ऑपरेशन सिंदूर में शर्मनाक हार और देश के भीतर फैली भयंकर आर्थिक कंगाली के बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। देश की जनता बदहाली के दौर से गुजर रही है, लेकिन वहां के हुक्मरान अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। जनता का ध्यान भटकाने और अपने पुराने पड़ चुके हथियारों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के उद्देश्य से पाकिस्तान ने अपनी फतह-4 क्रूज मिसाइल का नया परीक्षण किया है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यह मिसाइल पूरी तरह से चीन से आयातित स्पेयर पार्ट्स पर आधारित है। भारत के अभेद्य S-400 डिफेंस सिस्टम के सामने इसकी कोई भी हैसियत नहीं है। भारतीय सेना का S-400 का एडवांस्ड रडार इस मिसाइल को सैकड़ों किलोमीटर दूर से ही भांप लेगा और इसे हवा में ही राख में बदल देगा।

खाली खजाने के बावजूद मिसाइल का दिखावा

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मिली करारी शिकस्त और रावलपिंडी तक हुई तबाही के जख्म अभी तक सूखे भी नहीं थे कि पाकिस्तान ने एक बार फिर अपना वही पुराना और घटिया चेहरा दुनिया के सामने रखा है। महंगाई की आग में झुलस रहे पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात हैं, फिर भी वहां के शासकों ने जनता के पेट काटने के बजाय अरबों रुपये आतंक के अड्डों को मजबूत करने में फूंक दिए। जब दुनिया भर से कर्ज की भीख मांगने के बाद भी उन्हें दुत्कार मिली, तो पाकिस्तानी सेना ने एक नया पैंतरा चला है। फतह-4 मिसाइल के इस परीक्षण का मकसद अपनी जर्जर होती सैन्य छवि को किसी तरह बनाए रखना है। सवाल यह है कि क्या इस फ्लॉप मिशन से पाकिस्तान का खाली खजाना भर पाएगा या फिर भारतीय सुरक्षा कवच इसकी धज्जियां उड़ा देगा?

क्या है फतह-4 की सच्चाई?

पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग यानी ISPR ने दावा किया है कि यह मिसाइल पहले के संस्करणों की तुलना में काफी अधिक दूरी तक सटीक निशाना लगाने में सक्षम है। इसमें नई नेविगेशन टेक्नोलॉजी और उन्नत एवियोनिक्स का इस्तेमाल किया गया है। टेस्ट के तुरंत बाद वहां के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेनाध्यक्ष ने वैज्ञानिकों को ऐसी बधाइयां दीं जैसे देश की तमाम समस्याएं एक झटके में खत्म हो गई हों। लेकिन रक्षा जानकारों के अनुसार, यह केवल अपनी जनता को भ्रमित करने की एक सोची-समझी पटकथा है।

  • लंबी रेंज का दावा: पाक सेना का दावा है कि इसका एक्सटेंडेड वर्जन दुश्मन के एयर डिफेंस को चकमा देने में सक्षम है।
  • नेविगेशन और जीपीएस: इसमें आधुनिक नेविगेशन सिस्टम होने का दावा किया गया है ताकि यह कम ऊंचाई पर उड़कर रडार की नजरों से बच सके।
  • सैटलाइट गाइडेंस: दावा किया जा रहा है कि यह मिसाइल अंतिम क्षणों में भी अपना रास्ता बदल सकती है।

हकीकत में, इन तकनीकी उपलब्धियों की कलई तब खुल जाती है जब हम देखते हैं कि इसमें इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर कलपुर्जे चीन से मिले हैं या वहां से चुराए गए हैं। बिना चीनी खैरात के पाकिस्तान का पूरा रक्षा ढांचा धराशायी हो जाएगा।

भारत का S-400 और फतह-4 का अंत

पाकिस्तान भले ही फतह-4 की रेंज और तकनीक का कितना भी ढिंढोरा पीट ले, लेकिन भारतीय वायुसेना के पास मौजूद S-400 ट्राइंफ सिस्टम इस मिसाइल के लिए यमराज साबित होगा। इसके कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • लंबी दूरी से निगरानी: S-400 का रडार फतह-4 जैसे किसी भी खतरे को लॉन्च होते ही 250 से 400 किलोमीटर की दूरी से ही ट्रैक करना शुरू कर देता है।
  • हवा में खात्मा: फतह-4 जैसी सबसोनिक या लो-सुपरसोनिक मिसाइलें S-400 की हाइपरसोनिक मिसाइलों का मुकाबला नहीं कर सकतीं, जो Mach 12 की घातक रफ्तार से हमला करती हैं। भारतीय डिफेंस सिस्टम इसे सीमा पार करने से पहले ही नष्ट कर देगा।
  • बहुस्तरीय सुरक्षा: भारत के पास केवल S-400 ही नहीं, बल्कि आकाश, बराक-8 और बीएमडी जैसे कई लेयर वाले सुरक्षा कवच हैं।

कंगाली में मिसाइल का शौक

पाकिस्तान के इस कदम का पूरी दुनिया में मजाक उड़ रहा है। एक तरफ जनता आटे-दाल के लिए मोहताज है और दूसरी तरफ सरकार अपनी अर्थव्यवस्था की बलि चढ़ाकर हथियारों का प्रदर्शन कर रही है। बलूचिस्तान में BLA और उत्तर-पश्चिम में TTP ने पाकिस्तानी सेना को हर मोर्चे पर घेर रखा है। ऐसी स्थिति में करोड़ों डॉलर मिसाइल परीक्षण में फूंकना अपनी ही भूखी जनता के साथ क्रूर मजाक है। पाकिस्तानी जनरलों का असली गेमप्लान जनता का ध्यान अपनी विफलताओं से हटाकर फर्जी देशभक्ति की ओर ले जाना है। वे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को यह संकेत भी देना चाहते हैं कि उनके पास मिसाइलें हैं, ताकि उन्हें और अधिक कर्ज मिले।

निष्कर्ष

भारत की सुरक्षा नीतियां किसी भी गीदड़भभकी से विचलित होने वाली नहीं हैं। मजबूत अर्थव्यवस्था, स्वदेशी तकनीक और एक अनुशासित सेना ही किसी देश की असली ताकत होती है। फतह-4 जैसी मिसाइलें केवल कागजी दावे हो सकती हैं, लेकिन युद्ध के मैदान में ये चीनी कलपुर्जे भारतीय आधुनिक हथियारों के सामने टिक नहीं पाएंगे। पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिए कि यदि उसने दुस्साहस किया, तो भारत का जवाब इतना जोरदार होगा कि उसे अपनी मिसाइलों का मलबा ढूंढने में भी पसीना आ जाएगा। भारत अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए हर तरह से तैयार है और किसी भी हद तक जाने का साहस रखता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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