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12 घंटे पहले
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पाकिस्तान में चौतरफा नाकामी और गहराता बिजली संकट
पाकिस्तान सरकार की विफलताएं अब केवल कूटनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रही हैं, बल्कि देश की सड़कों और घरों तक पहुंच गई हैं। एक तरफ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ बिशेक में आयोजित एससीओ समिट में अपनी साख खोकर लौटे हैं, तो दूसरी तरफ पूरा पाकिस्तान घोर अंधेरे की गिरफ्त में है। कराची जैसे आर्थिक केंद्र से लेकर लाहौर तक लोग बिजली की किल्लत से त्रस्त हैं। स्थिति यह हो गई है कि सूरज ढलते ही पाकिस्तान के बड़े शहर वीरान हो जाते हैं और नागरिक 16 से 24 घंटे तक बिजली का इंतजार करने को मजबूर हैं। यह केवल एक अस्थायी संकट नहीं, बल्कि पाकिस्तान की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था और कमजोर प्रबंधन का एक बड़ा प्रमाण है।
एलएनजी संकट और सरकारी खजाने का बहाना
पाकिस्तान में चल रहे मौजूदा बिजली संकट का प्राथमिक कारण लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी एलएनजी का अभाव है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें बेतहाशा बढ़ गई हैं और शहबाज सरकार ने देश के खजाने को खाली होने से बचाने के लिए महंगी गैस खरीदने से स्पष्ट मना कर दिया है। सरकार का तर्क है कि इस समय ऊंची दरों पर गैस खरीदना देश पर वित्तीय बोझ बढ़ाएगा, लेकिन इस फैसले ने आम जनता की मुसीबतें कई गुना बढ़ा दी हैं। पाकिस्तान एलएनजी लिमिटेड ने 8 सितंबर तक के लिए जारी किए गए अपने इमरजेंसी टेंडर को रद्द कर दिया है, जिसके कारण देश के पावर प्लांटों के लिए ईंधन का संकट और गहरा गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का तनाव और गैस की आपूर्ति में बाधा
पश्चिम एशिया में ईरान और अन्य देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर सीधे तौर पर पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकाबंदी जैसी स्थितियों के कारण तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीपी पीएलसी (BP Plc) नामक कंपनी ने पाकिस्तान को 27 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट की दर से गैस देने का प्रस्ताव दिया था। यह दर युद्ध से पहले की कीमतों के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा थी। आर्थिक तंगी से जूझ रही सरकार के लिए इतने ऊंचे दामों पर गैस का आयात करना नामुमकिन जैसा हो गया, जिसके चलते देश में 4,000 मेगावाट से ज्यादा की बिजली कमी उत्पन्न हो गई है।
कतर का फोर्स मैज्योर और उम्मीदों पर पानी
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती कतर से आने वाली गैस का रुकना है। कतर लंबे समय तक पाकिस्तान का मुख्य एलएनजी प्रदाता रहा है। जुलाई में कतर के एक गैस टैंकर पर हमले के बाद इस निर्यातक देश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए होर्मुज खाड़ी से जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है। कतर ने फोर्स मैज्योर प्रावधान का उपयोग करते हुए अपनी आपूर्ति को अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। यह कानूनी प्रावधान देशों को किसी अनहोनी या नियंत्रण से बाहर की स्थिति में अनुबंधों को निलंबित करने की छूट देता है। कतर के इस कदम ने पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा की अंतिम उम्मीदों को भी समाप्त कर दिया है।
अंधेरे में डूबे शहर और ठप होता जनजीवन
इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (IEEFA) के अनुसार, पाकिस्तान का नेशनल पावर ग्रिड काफी जर्जर और कमजोर है। पाकिस्तान की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से एलएनजी पर निर्भर है। दिन के समय सौर ऊर्जा से काम चल जाता है, लेकिन सूर्यास्त होते ही स्थिति बिगड़ जाती है। जीवाश्म ईंधन से चलने वाले पावर प्लांट एलएनजी की कमी के कारण बंद पड़े हैं।
- कराची में हाहाकार: शहर के कई इलाकों में 16 से 24 घंटे की बिजली कटौती ने जनजीवन को पूरी तरह ठप कर दिया है। पानी की आपूर्ति, कामकाज और बच्चों की पढ़ाई पर इसका गहरा असर पड़ा है।
- लाहौर और पंजाब का हाल: संकट केवल कराची तक सीमित नहीं है। लाहौर सहित पूरे पंजाब प्रांत में भी अघोषित बिजली कटौती का दौर जारी है।
- 4,000 मेगावाट का घाटा: देश में बिजली की कुल मांग और उत्पादन के बीच का अंतर 4,000 मेगावाट (MW) के खतरनाक स्तर को पार कर गया है।
महंगाई की दोहरी मार और आर्थिक भविष्य पर खतरा
ऊर्जा संकट के साथ-साथ आम जनता पर महंगाई का बोझ भी बढ़ रहा है। पाकिस्तान की रेगुलेटरी अथॉरिटी ने फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट के तहत प्रति यूनिट बिजली दर में 0.75 पीकेआर की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इससे पहले से ही बेहाल आवाम के बिल अब और अधिक आने लगे हैं। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण पाकिस्तान को विदेशों से मिलने वाली रेमिटेंस राशि पर भी खतरा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में सऊदी अरब से पाकिस्तानी प्रवासियों ने 9.4 बिलियन डॉलर और संयुक्त अरब अमीरात से 7.83 बिलियन डॉलर देश भेजे थे। यदि मध्य पूर्व का संघर्ष लंबा खिंचता है, तो पाकिस्तान को महंगे आयात और गिरती विदेशी मुद्रा दोनों का सामना करना पड़ेगा।
शहबाज शरीफ की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत
एससीओ समिट के दौरान शहबाज शरीफ की कूटनीतिक हार ने भी पाकिस्तान की छवि को नुकसान पहुंचाया है। वे न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने आतंकवाद के मुद्दे पर मौन रहे, बल्कि अन्य विश्व नेताओं के बीच भी अलग-थलग दिखाई दिए। फोटो सेशन के दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश में विफल रहना और बाद में ग्रुप फोटो से भारतीय प्रधानमंत्री की तस्वीर को क्रॉप करने की ओछी हरकत करना, जिसने पाकिस्तान को दुनिया के सामने ट्रोल करवाया, उनकी विफलता को दर्शाता है। किसी भी बड़े नेता ने उनके साथ किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीरता से बात नहीं की, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी किरकिरी हुई।
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