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6 घंटे पहले
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पाकिस्तान में एक बार फिर सियासी घमासान अपने चरम पर पहुंच गया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल से तत्काल रिहाई की मांग को लेकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) का आंदोलन अब सीधे तौर पर देश की केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से शुरू हुआ यह 'लॉन्ग मार्च' अब देश की राजधानी इस्लामाबाद की दहलीज पर दस्तक दे रहा है। इस विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व खुद खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी कर रहे हैं, जिनकी अगुवाई में हजारों प्रदर्शनकारियों का हुजूम इस्लामाबाद की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पूरी तरह से हरकत में आ गई है और सोमवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है, जिसमें कई कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन की आहट और शहबाज सरकार की तैयारी
इस्लामाबाद की ओर बढ़ते इस मार्च ने शहबाज शरीफ सरकार की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। राजनैतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि केंद्र सरकार इस विरोध प्रदर्शन को रोकने और राजधानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई भी बड़ा कदम उठा सकती है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सोमवार को होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में देश की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा करेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के राजनीतिक हालात पर विशेष रूप से मंथन किया जाएगा।
केंद्र सरकार के सामने इस संकट से निपटने के लिए कई संवैधानिक और कानूनी रास्ते खुले हैं, जिनमें खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू करना या फिर वहां सीधे तौर पर गवर्नर रूल यानी राष्ट्रपति शासन लगाना शामिल है। इस संभावित कदम को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। प्रधानमंत्री ने इस सिलसिले में खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी से भी संपर्क साधा है और उनसे राज्य की ताजा सुरक्षा व राजनीतिक परिस्थितियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। अगर केंद्र सरकार इस प्रांत में गवर्नर शासन लागू करने का फैसला लेती है, तो पीटीआई और केंद्र के बीच का यह विवाद एक बेहद खतरनाक और नए स्तर पर पहुंच सकता है।
हजारों समर्थकों के साथ आगे बढ़ रहे मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस लॉन्ग मार्च में जनता का भारी समर्थन देखा जा रहा है। रविवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से 5,000 से भी अधिक उत्साही इमरान समर्थक इस्लामाबाद के लिए रवाना हुए। इस काफिले का नेतृत्व खुद मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी कर रहे हैं, जिससे इस प्रदर्शन को भारी राजनीतिक वजन मिल गया है। मुख्यमंत्री अफरीदी ने रविवार को लक्की मरवत पहुंचकर वहां के प्रसिद्ध गांदी चौक पर उमड़े जनसैलाब को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और पीटीआई समर्थकों का हौसला बढ़ाया। इसके बाद यह विशाल काफिला करक की ओर आगे बढ़ गया।
गांदी चौक पर दिए अपने भाषण में मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने साफ किया कि उनके इस आंदोलन का आधार हिंसा नहीं बल्कि जनता की आवाज है। उन्होंने कहा, "हमारे पास कोई बंदूक या रॉकेट लॉन्चर नहीं है, हमारे पास केवल और केवल जनता की असीम ताकत है।" इसके साथ ही उन्होंने प्रांत की सुरक्षा नीतियों पर भी अपनी बात रखी और स्पष्ट किया कि उनकी सरकार खैबर पख्तूनख्वा की धरती पर किसी भी प्रकार के सैन्य ऑपरेशन या ड्रोन हमलों को कतई स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने पिछली सरकारों की नीतियों की तीखी आलोचना करते हुए दावा किया कि पिछले 22 वर्षों के दौरान अपनाई गई गलत नीतियों के कारण ही इस प्रांत में आतंकवाद का ग्राफ बढ़ा है। इसके विपरीत, उन्होंने इमरान खान के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि इमरान खान के साढ़े तीन साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान खैबर पख्तूनख्वा में पूर्ण रूप से शांति स्थापित रही थी।
इमरान खान की रिहाई बनी मुख्य एजेंडा
इस पूरे विवाद की मुख्य वजह पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग है। पीटीआई के कार्यकर्ता और समर्थक लगातार अपने नेता को जेल से बाहर निकालने के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इमरान खान को वर्ष 2023 में भ्रष्टाचार के विभिन्न संगीन आरोपों के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करती आई है और इसे पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताती है।
इमरान खान का राजनीतिक सफर पिछले कुछ वर्षों में बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। अप्रैल 2022 में संसद में उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने के बाद उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ी थी। इसके बाद फरवरी 2024 में देश में आम चुनाव कराए गए, जिसके बाद शहबाज शरीफ के नेतृत्व में एक बार फिर गठबंधन सरकार का गठन हुआ। पीटीआई ने इन चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली और हेराफेरी के आरोप लगाए थे, हालांकि तत्कालीन सरकार और चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया था। अब पीटीआई ने एक बार फिर सड़क पर उतरकर शहबाज सरकार पर चौतरफा दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है।
इस्लामाबाद में किलेबंदी और कड़े सुरक्षा इंतजाम
जैसे-जैसे पीटीआई का यह मार्च इस्लामाबाद के करीब पहुंच रहा है, राजधानी में सुरक्षा को लेकर तनाव का माहौल गहराता जा रहा है। शहबाज शरीफ सरकार ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी दी है कि किसी भी सूरत में उन्हें राजधानी की सीमा के भीतर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खैबर पख्तूनख्वा के कई संवेदनशील इलाकों और रास्तों पर तुरंत प्रभाव से धारा 144 लागू कर दी गई है।
इसके साथ ही, इस्लामाबाद की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक स्तर पर काम शुरू कर दिया है। स्काई न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी की ओर जाने वाले तमाम मुख्य मार्गों पर कई हफ्तों से बड़े-बड़े स्टील के कंटेनर लगाए गए हैं। इन भारी-भरकम कंटेनरों को आपस में वेल्ड किया गया है और इनके अंदर रेत भरी गई है ताकि प्रदर्शनकारी इन्हें आसानी से हटा न सकें। इन कंटेनरों का इस्तेमाल मुख्य सड़कों को पूरी तरह से सील करने के लिए किया जा रहा है। सरकार की इस रणनीति से साफ है कि वह प्रदर्शनकारियों का सामना बेहद कड़ाई से करने के लिए तैयार है।
शहबाज शरीफ की बैठक पर टिकीं सबकी निगाहें
पाकिस्तान के वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में सोमवार को होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में सरकार आगे की ठोस रणनीति तय करेगी। इस बैठक में न केवल सुरक्षा बलों की तैनाती पर चर्चा होगी, बल्कि उन सरकारी प्रतिनिधियों और मंत्रियों से भी बातचीत की जाएगी जो पीटीआई के साथ बातचीत करने के लिए गठित की गई समिति का हिस्सा रहे हैं।
सरकार के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे इस्लामाबाद की कानून-व्यवस्था को बिगड़ने से बचाना है और इस मार्च को रोकना है, तो दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में लगातार बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर भी नियंत्रण पाना है। दूसरी ओर, पीटीआई भी किसी भी हालत में अपने कदम पीछे खींचने को तैयार नजर नहीं आ रही है, जिससे आने वाले दिनों में पाकिस्तान में राजनीतिक संकट और गहराने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।
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