लालकृष्ण आडवाणी का 99वां जन्मदिन: पीएम मोदी ने बताया विचारधारा और सिद्धांतों के प्रति उनके अटूट समर्पण का राज राष्ट्रीय राजनीति 11 घंटे पहले 10
भारतीय राजनीति के दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी के 99वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावुक लेख लिखकर उनके जीवन के छह दशकों के योगदान को याद किया है। पीएम ने विभाजन की पीड़ा झेलकर शून्य से शिखर तक पहुंचने वाले आडवाणी जी के संघर्ष और सिद्धांतों के प्रति उनकी निष्ठा को एक बड़ी प्रेरणा बताया है।

राजनीति के एक युग का नाम है लालकृष्ण आडवाणी

भारतीय राजनीति की दिशा और दशा बदलने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी 8 नवंबर को अपने जीवन के 99वें वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं। जन्मदिन का यह अवसर और भी खास इसलिए हो गया है क्योंकि यह दीपावली के पावन पर्व के साथ जुड़ा है। इस विशेष दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट और एक विस्तृत लेख के माध्यम से लालकृष्ण आडवाणी को शुभकामनाएं देते हुए उनके लंबे राजनीतिक सफर को नमन किया है।

एक भावुक जुड़ाव और गुरु-शिष्य की परंपरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लेख में व्यक्तिगत भावनाओं को व्यक्त करते हुए लिखा कि वे खुद को अत्यंत सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें दशकों तक लालकृष्ण आडवाणी का सान्निध्य और मार्गदर्शन मिला। उन्होंने साझा किया कि आडवाणी जी उनके लिए एक अभिभावक की तरह रहे हैं। राजनीति की बारीकियों को समझने से लेकर कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने तक, हर मोड़ पर आडवाणी जी की सीख पीएम मोदी के लिए संबल बनी है। उन्होंने कहा कि आज भी जब वे आडवाणी जी से मिलने जाते हैं, तो वह समय उन्हें नई ऊर्जा से भर देता है।

विभाजन की विभीषिका से सफलता की नई इबारत तक

आडवाणी जी का जन्म 8 नवंबर, 1927 को देव दीपावली के दिन हुआ था। प्रधानमंत्री ने उनके जीवन के उस दौर को याद किया जब 1947 में उन्हें विभाजन की पीड़ा का सामना करना पड़ा। सिंध से अपनी जड़ों को छोड़कर भारत आने के बाद उन्होंने शून्य से नई शुरुआत की। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि इतनी बड़ी त्रासदी झेलने के बाद भी आडवाणी जी के मन में कभी कोई कड़वाहट नहीं आई। नए सिरे से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर वे आगे बढ़ते रहे। यही वह गुण था जिसने जनसंघ को मजबूती दी और आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी के उदय का आधार बना।

संगठन के विस्तार में आडवाणी जी की भूमिका

प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि आडवाणी जी के नेतृत्व में भाजपा ने जो सफलताएं हासिल कीं, वे अभूतपूर्व हैं। 1989 में कांग्रेस की सीटों में भारी गिरावट और 1996 में भाजपा का देश की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरना, आडवाणी जी की मेहनत का परिणाम था। उन्होंने कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियां तैयार कीं और पार्टी के भीतर राष्ट्र प्रथम की संस्कृति को स्थापित किया। उनके भाषणों और उनके द्वारा लिखे गए प्रस्तावों में हमेशा वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक प्रखरता दिखाई देती थी।

अटल-आडवाणी की बेजोड़ जुगलबंदी

भारतीय राजनीति के इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की जोड़ी को एक अनुकरणीय मिसाल माना जाता है। पीएम मोदी ने लिखा कि पांच-छह दशकों तक इन दोनों नेताओं ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। अक्सर राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं सहयोगियों के बीच दूरियां पैदा कर देती हैं, लेकिन अटल जी और आडवाणी जी का साथ आपसी विश्वास और सम्मान की एक मिसाल रहा। अटल जी के अंतिम समय तक उनके बीच का यह गहरा रिश्ता कायम रहा।

संसदीय जीवन और प्रशासनिक कुशलता

दिल्ली महानगर परिषद के अध्यक्ष के रूप में शुरुआत करने वाले आडवाणी जी का संसदीय करियर अत्यंत प्रभावशाली रहा है। 1970 के दशक में सांसद बनने के बाद उन्होंने दोनों सदनों में अपनी वाकपटुता और तर्कशक्ति से अपनी पहचान बनाई। जनता सरकार के दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल को आज भी सराहा जाता है। बाद में, उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में उन्होंने भारत की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जो कदम उठाए, वे आज भी याद किए जाते हैं। आतंकवाद के खिलाफ उनका रुख हमेशा कठोर और स्पष्ट रहा, जिसके कारण देश को आतंकवाद विरोधी मजबूत कानून प्राप्त हुए।

ऐतिहासिक रथयात्रा और राम मंदिर का सपना

सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा को पीएम मोदी ने उनके जीवन का सबसे ऐतिहासिक अध्याय बताया है। उन्होंने स्वयं इस यात्रा में सहयोग दिया था और सोमनाथ में इसकी शुरुआत के समय मौजूद थे। उन्होंने याद दिलाया कि बिहार में गिरफ्तारी के बाद भी आडवाणी जी का संकल्प नहीं डगमगाया। उनके उस संघर्ष का ही परिणाम है कि आज अयोध्या में प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है। उन्होंने कहा कि यह पूरी रथयात्रा धैर्य और सहनशक्ति का एक जीवंत उदाहरण थी।

जीवन के अनछुए पहलू: सादगी और अध्ययन का शौक

प्रधानमंत्री ने आडवाणी जी की सादगी का जिक्र करते हुए एक किस्सा साझा किया कि कैसे वे जूनागढ़ में एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह एक महीने तक रहे। उन्हें किताबों, अखबारों और सिनेमा का गहरा शौक रहा है। उन्होंने अपनी पुस्तकों 'My Country My Life' और ‘A Prisoner’s Scrap-Book’ के माध्यम से इतिहास और अपने अनुभवों को सहेजा है। कमला आडवाणी जी का स्मरण करते हुए पीएम ने कहा कि उनके लंबे सार्वजनिक जीवन में वे हमेशा उनकी सबसे बड़ी शक्ति बनकर रहीं।

राष्ट्र की कृतज्ञता और भविष्य के लिए प्रार्थना

वर्ष 2024 में देश ने उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित करके उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। पीएम मोदी ने अपने लेख के समापन में कहा कि आडवाणी जी का सौवें वर्ष में प्रवेश करना पूरे देश के लिए एक सुखद अनुभूति है। उन्होंने ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की है ताकि वे आगे भी देश को प्रेरित करते रहें और उनका मार्गदर्शन मिलता रहे।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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