चुनाव आयोग पर निशाना साधने के बजाय राहुल गांधी को टटोलनी होगी जनता की नब्ज, तभी मिलेगी सत्ता की चाबी
राष्ट्रीय राजनीति
3 घंटे पहले
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मोदी-शाह के दौर में एंटी-इनकम्बेंसी पर राहुल गांधी की हैरानी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों एक गहरे असमंजस में नजर आ रहे हैं। उन्हें इस बात पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि देश की राजनीति से सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी-इनकम्बेंसी आखिर कहां गायब हो गई है। खासकर जब से देश की राजनीतिक कमान नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हाथों में आई है, तब से विपक्षी दलों के लिए सत्ता का रास्ता बेहद कठिन होता दिख रहा है। राहुल गांधी इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि इतने लंबे समय तक शासन करने के बावजूद जनता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ कोई बड़ी नाराजगी क्यों नहीं दिख रही है।
चुनाव आयोग पर आरोपों की राजनीति
अपनी इस राजनीतिक विफलता का ठीकरा राहुल गांधी सीधे तौर पर चुनाव आयोग के सिर पर फोड़ रहे हैं। उनका सीधा आरोप है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ECI के साथ मिलीभगत करके लगातार सत्ता में बनी हुई है। राहुल गांधी का मानना है कि चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित होने के कारण ही कांग्रेस को चुनावी सफलता नहीं मिल पा रही है।
क्या वाकई विपक्ष की रणनीति में है कोई बड़ी कमी?
अब देश के राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या राहुल गांधी द्वारा उठाए जा रहे ये तर्क वाकई तर्कसंगत हैं? क्या कांग्रेस के सत्ता से दूर रहने की असल वजह सिर्फ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली है, या फिर इसके पीछे कोई और गहरा कारण छिपा है? इन सभी पहलुओं को गहराई से समझना और विश्लेषण करना बेहद जरूरी है, क्योंकि बिना जनता की असली नब्ज को टटोले सत्ता की राह आसान नहीं होने वाली।
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