राष्ट्रीय राजनीति
3 घंटे पहले
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विचारों
लद्दाख पर चीन को भारत की खरी-खरी
भारत ने लद्दाख को लेकर अपनी स्थिति एक बार फिर मजबूती से दोहराई है। विदेश मंत्रालय ने चीन की ओर से की गई आपत्तियों को दरकिनार करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि लद्दाख भारत का एक अभिन्न और अविभाज्य अंग है। बीजिंग की ओर से चाहे कितनी भी इनकार की भाषा बोली जाए, लेकिन इस जमीनी हकीकत को कोई भी देश नहीं बदल सकता। भारत का यह कड़ा रुख तब सामने आया है जब चीन ने लद्दाख के कुछ इलाकों को आधिकारिक मानचित्र में शामिल किए जाने के भारत के फैसले पर नाखुशी जताई थी।
मैपिंग में सुधार का उद्देश्य
विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि गृह मंत्रालय की ओर से जारी की गई हालिया प्रेस विज्ञप्ति पूरी तरह से स्पष्ट है। इस पहल के तहत केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में स्थित कुल 28 स्थानों और महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं की पहचान की गई है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग यानी Survey of India ने अपने आधिकारिक मानचित्रों में इन जगहों को उनके मानक और सटीक भौगोलिक नामों के साथ अंकित किया है।
स्थानीय परामर्श के बाद हुआ फैसला
भारत सरकार ने चीन के दावों को खारिज करते हुए बताया कि यह प्रक्रिया अचानक या बिना किसी आधार के नहीं अपनाई गई है। भारत ने जोर देकर कहा है कि:
- यह पूरा कार्य लद्दाख प्रशासन के साथ मिलकर पूरा किया गया है।
- इस प्रक्रिया में वहां के स्थानीय हितधारकों से भी गहन परामर्श किया गया है।
- इस कवायद का मुख्य लक्ष्य आधिकारिक दस्तावेजों में इन स्थानों को औपचारिक पहचान दिलाना है।
- इसका एक उद्देश्य इन भौगोलिक स्थलों के प्रति आम लोगों की जानकारी और जागरूकता को बढ़ाना भी है।
भारत सरकार का मानना है कि इन स्थानों की सटीक पहचान सुनिश्चित करना प्रशासनिक दृष्टि से बेहद जरूरी था, ताकि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बनी रहे और आम नागरिकों को भी अपने क्षेत्र के भौगोलिक विस्तार की सही जानकारी मिल सके। चीन की आपत्ति के बावजूद भारत का संदेश साफ है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता के प्रति पूरी तरह सतर्क और दृढ़ है।
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