शरद पूर्णिमा 2026: चंद्र दोष से छुटकारा पाने के लिए आजमाएं ये 5 प्रभावी उपाय धर्म एक घंटा पहले 4
शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी संपूर्ण 16 कलाओं में होते हैं, जिससे यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्र दोष दूर करने के लिए विशेष माना गया है।

चंद्र दोष और शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा आकाश में अपनी पूर्ण 16 कलाओं के साथ विराजमान होते हैं और धरा पर अमृत की वर्षा करते हैं। चूंकि इस समय चंद्रमा की ऊर्जा अपने चरम पर होती है, इसलिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह दिन कुंडली में मौजूद चंद्र दोषों को समाप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। आगामी 25 अक्टूबर 2026 को आने वाली शरद पूर्णिमा के अवसर पर कुछ सरल उपाय करके आप चंद्र संबंधी नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति पा सकते हैं।

चंद्र दोष का अर्थ और दुष्प्रभाव

ज्योतिष गणना के अनुसार, जब चंद्रमा शनि, राहु या केतु जैसे क्रूर ग्रहों की युति में होते हैं या उन पर इन ग्रहों की दृष्टि पड़ रही होती है, तो चंद्र दोष का निर्माण होता है। इसके अलावा, यदि चंद्रमा नीच राशि यानी वृश्चिक में स्थित हों, तो भी यह दोष प्रभावी हो जाता है। एक अन्य स्थिति जिसे केमद्रुम योग कहा जाता है, तब बनती है जब चंद्रमा के दूसरे और बारहवें भाव में कोई अन्य ग्रह मौजूद न हो और चंद्रमा पर किसी की दृष्टि न पड़े। चंद्र दोष होने पर व्यक्ति को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:

  • मानसिक अस्थिरता और तनाव का अनुभव होना।
  • महत्वपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता में कमी आना।
  • माता के साथ संबंधों में कटुता या मतभेद होना।
  • लगातार आर्थिक तंगी और मानसिक अशांति का बने रहना।

चंद्र दोष दूर करने के लिए करें ये 5 विशेष कार्य

शरद पूर्णिमा की रात्रि का लाभ उठाकर आप अपने जीवन से इन नकारात्मक प्रभावों को दूर कर सकते हैं। इसके लिए नीचे दिए गए पांच उपाय बेहद कारगर माने गए हैं:

  • मंत्रों का निरंतर जप: शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की शीतल रोशनी में बैठकर 'ॐ सोम सोमाय नमः' या 'ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः' मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, इन मंत्रों की शक्ति चंद्र दोष के दुष्प्रभाव को कम करने में सहायक होती है।
  • चंद्र यंत्र की स्थापना: अपने निवास स्थान पर चंद्र यंत्र को स्थापित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन इस यंत्र को विधि-विधान से घर में रखने पर जीवन की विभिन्न समस्याओं का निवारण होता है और चंद्र देव की कृपा प्राप्त होती है।
  • दान-पुण्य का महत्व: इस पवित्र दिन पर चंद्रमा से संबंधित वस्तुओं का दान करना अत्यंत फलदायी होता है। आप दूध, चावल, चीनी और सफेद वस्त्र जैसी वस्तुओं का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को कर सकते हैं। इससे चंद्रमा से मिलने वाली प्रतिकूलताएं दूर होती हैं।
  • चंद्रमा को अर्घ्य देना: शरद पूर्णिमा की रात्रि को एक पात्र में जल भरकर उसमें थोड़ा कच्चा दूध और अक्षत मिला लें। इसके बाद चंद्रमा की ओर मुख करके श्रद्धापूर्वक अर्घ्य अर्पित करें। यह सरल उपाय कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को मजबूत बनाता है।
  • भगवान शिव की आराधना: शास्त्रों के अनुसार चंद्रमा भगवान शिव के अनन्य भक्त हैं और उनके मस्तक पर विराजमान रहते हैं। इसलिए शरद पूर्णिमा की रात भगवान शिव की पूजा अर्चना करें और शिव मंत्रों का जप करें। शिव जी की कृपा से चंद्र दोष का प्रभाव तेजी से समाप्त होने लगता है।
प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप